29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Street Lights : Jaipur Nagar Nigam के हवाले 4750 स्ट्रीट लाइट्स का Mentinance

- अब तक जेडीए करता था इन लाइट्स की मेंटिनेंस  
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Pawan kumar

•

Updated: 7 Mar 2020, 10:19 AM IST

जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण ने शहर में लगी 4750 स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम को दे दिया है। जेडीए ने लाइट्स हस्तान्तरण के साथ ही रखरखाव करने वाले ठेकेदार फर्म की सूची भी नगर निगम को सौंप दी है।
जानकारी के अनुसार प्रमुख शासन सचिव नगरीय विकास एवं आवासन विभाग की अध्यक्षता में 3 मई 2019 को स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव को लेकर बैठक हुई थी। इसमें जयपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। इस बैठक में ये तय किया गया कि जेडीए 4750 स्ट्रीट लाइट्स का मेंटिनेंस नगर निगम को हस्तांतरित करेगा। मई 2019 में लिए गए फैसले के मुताबिक जेडीए ने 4750 लाइट्स रखरखाव के लिए जयपुर नगर निगम को सौंप दी है। इससे पहले जेडीए और नगर निगम की टीमों ने संयुक्त मौका मुआयना किया था। अब इन लाइट्स की मेंटिनेंस नगर निगम करेगा। गौरतलब है कि जेडीए और नगर निगम के बीच स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव को लेकर अक्सर विवाद होता आया है। इसे देखते हुए अब जेडीए के क्षेत्राधिकार वाली 4750 स्ट्रीट लाइट्स नगर निगम को सौंपी गई है।

बायोमेट्रिक हाजरी स्थगित
जयपुर विकास प्राधिकरण में कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर बायोमेट्रिक पद्धति से अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति को 11 मार्च से आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया है। जेडीए सचिव अर्चना सिंह ने बताया कि प्राधिकरण के सभी प्रकोष्ठ के अधिकारी, नियंत्रक अधिकारी और अधीनस्थ कार्मिकों की उपस्थिति 11 मार्च से उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज करेंगे।

11 भूखण्डों से मिले साढ़े 5 करोड़
जेडीए ने मार्च महीने के प्रथम सप्ताह में 11 आवासीय, व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक भूखण्डों की नीलामी से 5.48 करोड रूपए का राजस्व प्राप्त किया है। जयपुर विकास आयुक्त टी. रविकांत ने बताया कि आमजन में जेडीए की प्राइम लोकेशन पर स्थित प्रोपर्टी को लेकर खासा उत्साह एवं विश्वास देखने को मिल रहा है। नीलामी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। जिसके कारण निर्धारित दरों से अधिक दर पर भूखण्डों की नीलामी हो रही है।