जयपुर। जेकेके में चल रहे पंचतत्व उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार केा बिज्जी की कहानी ‘अनोखा पेड़’ का कथा का वाचन किया गया। प्रियदर्शिनी मिश्रा के निर्देशन में कलाकारों ने हुनर दिखया। यह एक ऐसे बच्चे की कहानी है जिसे गुलगुले बेहद पसंद है। बच्चा मां द्वारा बनाए 7 गुलगुलों में से एक गुलगुले को, गुलगुले के पेड़ की आशा में जमीन में रोपता है। आशा स्वरूप वह गुलगुलों का बीज प्रस्फुटित होता है और एक बड़ा वृक्ष बन जाता है। इसी बीच बच्चे का सामना एक डायन से होता है जो उसे खाना चाहती है। बच्चा दो बार अपनी सूझबूझ से उसके चंगुल से निकलकर वापस आ जाता है। तीसरी बार में वह भेष बदलकर आई डायन को सबक सीखाते हुए उसकी जीवन लीला समाप्त कर देता है और फिर से अपने गुलगुलु वाले वृक्ष पर मजे से गुलगुले खाने लगता है। यह कहानी आशावादी सोच को दर्शाती है। कथा वाचन लोक धुनों में पिरोए गए संगीत की प्रस्तुति के साथ हुआ जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। शाश्वत सिंह, दक्षेश सिंह जादौन, साची जैन,समर्थ शांडिल्य ने अभिनय का हुनर दिखाया। मंच से परे कपिल शर्मा और अनुज भट्ट ने संगीत संयोजन किया। अतिथियों में एनएसडी के पूर्व निदेशक देवेंद्र राज अंकुर, कला संस्कृति विभाग के सयुंक्त शासन सचिव पंकज ओझा,अभिनय गुरु मिलिंद इनामदार, फिल्म एक्टर जोजो उपस्थित रहे।