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कलरीपायट्टु: भारत की घातक मार्शल आर्ट

kalaripayattu को दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट तकनीक माना जाता है। इस कला की उत्पत्ति दक्षिण भारत के केरल में हुई। यह विश्व की पुरानी युद्ध कलाओं में से एक है। कलरीपायट्टु दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला कलरी जिसका मतलब ‘स्कूल’ या ‘व्यायामशाला’, वहीं दूसरे शब्द पायट्टु का मतलब होता है ‘युद्ध या व्यायाम करना’।

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कलरीपायट्टु को दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट तकनीक माना जाता है। इस कला की उत्पत्ति दक्षिण भारत के केरल में हुई। यह विश्व की पुरानी युद्ध कलाओं में से एक है। कलरीपायट्टु दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला कलरी जिसका मतलब ‘स्कूल’ या ‘व्यायामशाला’, वहीं दूसरे शब्द पायट्टु का मतलब होता है ‘युद्ध या व्यायाम करना’। कहते हैं कि कलरीपायट्टु एक ऐसी कला है जिसे सीखने में सालों लग जाते हैं। यह कला सिर्फ व्यायाम और शारीरिक चुस्ती फुर्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली बतायी जाती है। यह सीखने वाले व्यक्ति को ना सिर्फ एक प्रबल योद्धा बनाती है, बल्कि इसके जरिए लोग चिकित्सा की कला भी सीख जाते हैं। कलरीपायट्टु का अभ्यास ‘कलरी’ में किया जाता है, जिसे आम भाषा में इस कला का अखाड़ा भी कहा जा सकता है। इस कलरी में एक ओर पुत्तरा बना होता है जो ईश्वर का स्थान होता है। कलरी प्रशिक्षण आमतौर पर सात वर्ष की आयु से शुरू हो जाता है। जाहिर तौर पर यह वो समय होता है जब शरीर में सीखने की क्षमता और ताकत सबसे ज्यादा होती है। यह उम्र कच्ची मिट्टी के जैसे होती है। इस उम्र में अगर बच्चे को सही से ढाला जाए तो वह कलरीपायट्टु में महारत हासिल कर सकता है। हालांकि इस कला को गुरु के मार्गदर्शन में किसी भी उम्र में सीखा जा सकता है। आपको बता दें कि बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने भी कलरीपायट्टु की ताकत को पहचाना और इस कला को सीखा है। फिल्म बागी में टाइगर श्रॉफ ने ख़ास तौर पर कलरी की ट्रेनिंग ली थी। वहीं, अभिनेता विद्युत जामवाल ने 3 साल की उम्र से इस कला को सीखना शुरु कर दिया था। फिर भी, फिल्म कमांडो के लिए उन्होंने इसकी ख़ास ट्रेनिंग अलग से ली थी।