30 नवंबर 2020 को कार्तिक पूर्णिमा है। इसमें दान—पुण्य, पूजा—पाठ का बड़ा महत्व है, लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा चंद्रग्रहण के साये में मनेगी। हालांकि यह उपछाया चंद्रग्रहण होगा और देश के कुछ हिस्सों में ही देखा जा सकेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि उपछाया चंद्रग्रहण होने से सूतक नहीं लगेगा और सभी धर्म—कर्म पूर्ववत किए जा सकेंगे।
जयपुर. 30 नवंबर 2020 को कार्तिक पूर्णिमा है। इसमें दान—पुण्य, पूजा—पाठ का बड़ा महत्व है, लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा चंद्रग्रहण के साये में मनेगी। हालांकि यह उपछाया चंद्रग्रहण होगा और देश के कुछ हिस्सों में ही देखा जा सकेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि उपछाया चंद्रग्रहण होने से सूतक नहीं लगेगा और सभी धर्म—कर्म पूर्ववत किए जा सकेंगे।
शास्त्रों के अनुसार उपछाया ग्रहण के दौरान देवस्पर्श और पूजा—पाठ किए जा सकते हैं। दरअसल इसे ग्रहण माना ही नहीं गया है जिससे इसमें सूतक का विचार भी नहीं किया जाता है। मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं होते। साल के इस अंतिम चंद्रगहण के दौरान कुछ देर के लिए चंद्रमा की चमक कम हो जाएगी। चंद्रमा का बिंब काला होने से पहले ही ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला यह चंद्रग्रहण देश के उत्तर पूर्वी एवं मध्य पूर्वी राज्यों में दिखाई देगा। उपछाय़ा चंद्रग्रहण के कारण कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और भी बढ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार भले ही इसके प्रभाव अधिक नहीं होते लेकिन ग्रहण योग में दान—पुण्य और शुभ कर्मों को बहुत फलदायी बताया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा को लगनेवाला उपछाया चंद्रग्रहण
चंद्रग्रहण का स्पर्श दिन में 1.02 बजे
ग्रहण का मध्य शाम 3.13 बजे
ग्रहण का मोक्ष शाम 5.23 बजे
चंद्रोदय जहां शाम 5.23 बजे से पहले होगा वहां ग्रस्तोदय के रूप में इसे देखा जा सकेगा।