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Rajasthan TB Cases: राजस्थान में ट्यूबरकुलोसिस बीमारी ( टीबी रोग) अब भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। 2025 तक टीबी उन्मूलन का स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 7 दिसंबर से 30 दिसंबर तक चलाए गए अभियान के दौरान कुल 1.8 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 1.6 करोड़ लोग संवेदनशील आबादी से, जबकि शेष सामान्य आबादी से संबंधित थे।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 लाख 76 हजार 63 नए मामलों में से 1 लाख 9 हजार 523 मरीज संवेदनशील समूहों से मिले, जबकि 65 हजार 356 मरीज अन्य आबादी वर्गों से सामने आए।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सामने आए नए मरीजों को इलाज से जोड़ा जा रहा है, ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके।
चिंताजनक बात यह रही कि अन्य आबादी समूहों में टीबी पॉजिटिविटी दर 3 फीसदी दर्ज की गई, जबकि संवेदनशील समूहों में यह दर 1 फीसदी रही। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ये वे मामले थे, जो अब तक स्वास्थ्य विभाग की पहचान से दूरे थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि जयपुर जिले में सबसे अधिक टीबी के मामले दर्ज किए गए। जयपुर में 12416, जोधपुर में 5322, कोटा में 5081, अजमेर में 4861 और बीकानेर में 4637 मामले सामने आए हैं।
जयपुर में संवेदनशील समूहों में पॉजिटिविटी दर 1 फीसदी रही, जबकि गैर-संवेदनशील आबादी में यह बढ़कर 5 फीसदी तक पहुंच गई। अलवर जिले में गैर-संवेदनशील आबादी में टीबी पॉजिटिविटी दर 7 फीसदी, जबकि संवेदनशील समूहों में 1 फीसदी रही। बता दें कि चिकित्सा विभाग की ओर से 2024 में राजस्थान में 1 लाख 71 हजार 415 टीबी रोगियों का नोटिफिकेशन किया गया था।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ का कहना है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों से राजस्थान टीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अभियान के तहत HIV/AIDS, मधुमेह पीड़ित, 60 साल से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित व्यक्ति, धूम्रपान/मद्यपान करने वाले, प्रवासी मजदूर, आदिवासी समुदाय, टीबी के पुराने मरीज, साथ ही खनन और निर्माण स्थलों, जेलों और शहरी झुग्गियों में रहने वाले लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई।
देश में टीवी के 40 फीसदी मरीज ऐसे भी हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं देखे जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील आबादी में टीबी के मामलों की पहचान करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
हालांकि जो लोग टीबी से संक्रमित हैं, लेकिन अभी बीमार नहीं हुए हैं, वे दूसरों को संक्रमण नहीं फैला सकते। इस तरह के विशेष अभियान टीबी के प्रसार को नियंत्रित करने में मददगार साबित होंगे।
टीबी मुक्त भारत अभियान के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस एन धौलपुरिया की निगरानी एवं रिपोर्टिंग निक्षय पोर्टल एवं एएनएम/आशा डिजिटल हेल्थ मोबाइल ऐप के माध्यम से की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
राजस्थान में 2024 में 3,350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 586 थी। अभियान के तहत राजस्थान में 35 हजार से अधिक निक्षय मित्र पंजीकृत हो चुके हैं, जो टीवी मरीजों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।
विश्व टीबी दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राजस्थान को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान में तीसरे स्थान पर रहने पर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया था।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का कहना है कि विभाग 'आपणो स्वस्थ राजस्थान' की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। हमारा प्रयास है कि राजस्थान जल्द से जल्द टीबी मुक्त हो।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत समस्त संभावित क्षय रोगियों की निशुल्क जांच की जाती है। क्षय रोग पाए जाने पर स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में राज्य की समस्त चिकित्सा संस्थाओं पर क्षय निरोधक औषधियों का प्रतिदिन निशुल्क सेवन कराया जाता है।
कार्यक्रम के तहत इलाज ले रहे प्रत्येक रजिस्टर्ड क्षय रोगी को निक्षय पोषण योजना (NPY) के तहत इलाज अवधि के दौरान पोषक आहार हेतु 1,000 रुपए प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में सहायता राशि दी जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष सामने आने वाले नए मामलों में 21 फीसदी की कमी आई है।
2015 में प्रति लाख आबादी पर 237 से घटकर 2024 में प्रति लाख आबादी पर मरीजों की संख्या 187 हो गई है।
भारत में टीबी मृत्यु दर में भी गिरावट आई है। यह 2015 में प्रति लाख आबादी पर 28 थी, जो 2024 में घटकर प्रति लाख आबादी पर 21 हो गई।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है। यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है। टीबी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या थूकने से हवा के जरिए फैलती है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है।
टीबी जानलेवा हो सकती है, लेकिन इसका पता लगने पर इलाज संभव है और रोकथाम भी की जा सकती है।
Updated on:
20 Jan 2026 10:19 am
Published on:
19 Jan 2026 07:03 pm
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