अखण्ड सौभाग्य का पर्व करवा चौथ शुक्रवार को मनाया जाएगा। सुहागिनें निराहार रह पति दीर्घायु के लिए दिनभर प्रार्थना करेंगी। पर्व की तैयारियों के लिए शुक्रवार को दिनभर रौनक रही।
महिलाएं मेहंदी लगवाने, पार्लर में सजने-संवरने और बाजार से वस्त्र आभूषण खरीदने में व्यस्त रहीं। वहीं पति भी अद्धांगनि के लिए उपहार खरीदते नजर आए।
पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य व सुख समृद्धि की कामना के लिए महिलाओं द्वारा शुक्रवार को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इसे चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी भी कहा जाता है।
महिलाएं व्रत रखकर चौथ माता की कहानी सुनेंगी। महताब सिंह का नोहरा निवासी पंडित यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि अलवर में सूर्यास्त पश्चात रात्रि 8 बजकर 32 मिनट के पश्चात ही चंद्रोदय का समय है।
बारह कलाओं से युक्त होता है चंद्रमावर्ष में चार चौथ सौभाग्यदायिनी मानी जाती है। वैशाख, भाद्रपद, कार्तिक व माघ की। ये सभी कृष्ण पक्ष की चौथ होती हैं।

चंद्रमा की सौलह कलाएं होती हैं। इनमें चार कलाओं वाला चंद्रमा प्रत्येक शुक्लपक्ष की चतुर्थी को दिखाई देता है। ये चार कलाएं घटा देने पर बारह कलाओं वाला चंद्रमा कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को दिखाई देता है।
धार्मिक महत्ववर्ष में सर्वाधिक प्रकाशमान चंद्रमा होता है, आश्विन शुक्ल शरद चतुर्थी और मां गौरी की पूजा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को की जाती है। इसलिए महिलाओं द्वारा चौथ व्रत में गणेश जी व मां गौरी की कथा सुनकर जलग्रहण किया जाता है।
चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अध्र्य देकर महिलाएं अखंड, सौभाग्य, पुत्र-पौत्र तथा भरे पूरे परिवार की खुशहाली का वर मांगती हैं।