
ऋतब्रत बनर्जी (Photo- IANS)
Ritabrata Banerjee: कभी वामपंथी राजनीति का चेहरा रहे ऋतब्रत बनर्जी ने अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को दो धड़ों में बांट दिया है। सवाल है कि कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने बंगाल की राजनीति में एक दशक से ज्यादा समय तक दबदबे वाली पार्टी में हड़कंप मचा दिया है:
कोलकाता के जादवपुर इलाके से आने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने सीपीएम की छात्र इकाई एसएफआई में सक्रिय भूमिका निभाई। वह एसएफआई के अखिल भारतीय महासचिव बने। 2014 में मात्र 34 वर्ष की आयु में वाम मोर्चे की ओर से राज्यसभा भेजे गए।
संसदीय कार्यों में भी ऋतब्रत का रिकॉर्ड अच्छा रहा। उनकी उपस्थिति 77% रही। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य के करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद 2017 में सीपीएम से निकाल दिया गया। उसी वर्ष एक शोधार्थी ने उनपर रेप का आरोप लगाया जिससे उनकी राजनीति हाशिए पर आ गए थी।
वाम दल से बाहर होने के बाद ऋतब्रत ने टीएमसी में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की। उन्होंने उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्रों में पार्टी संगठन को मजबूत किया। तृणमूल की ट्रेड यूनियन इकाई के प्रमुख बनाए गए। 2024 में उन्हें टीएमसी ने राज्यसभा भेजा। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की।
दिल्ली में ऋतब्रत बनर्जी और भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी की मुलाकात हुई। इसके बाद ऋतब्रत और संदीपान साह को पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी के भीतर असंतोष के बाद 58 बागी विधायक अलग हो गए। विवाद तब शुरू हुआ था जब ऋतब्रत और साहा ने नेता विपक्ष चुनने के प्रस्ताव पर फर्जी साइन का आरोप लगाया। अब ऋतब्रत को नेता विपक्ष चुन लिया गया है।
Updated on:
6 Jun 2026, 4:49 AM IST
Published on:
6 Jun 2026, 4:49 AM IST
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