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कीलाडी में खुदाई के दौरान मिला मछली के चिह्न वाला मिट्टी का लाल घड़ा

Keeladi Excavation: तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में कीलाडी गांव में खुदाई के दौरान मिट्टी का एक घड़ा मिला है। हालांकि यह देखने में सामान्य घड़ों से अलग और प्राचीन है।
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Terracotta pot

खुदाई में मिला मिट्टी का लाल घड़ा (File Photo)

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के शिवगंगा (Sivaganga) जिले के कीलाडी (Keeladi) गांव में खुदाई का काम चल रहा है। वैगई नदी के किनारे स्थित यह गांव भारत (India) की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक से संबंधित है। इस जगह चल रहे 11वें चरण के उत्खनन में एक ऐसी चीज़ मिली है जो प्राचीन है। हम बात कर रहे हैं मिट्टी के लाल घड़े की, जिस पर मछली का चिह्न बना हुआ है।

संगम युग से संबंधित

कीलाडी में हुई इस खोज को काफी खास बताया जा रहा है। यह खोज कीलाडी की समृद्ध संगम युग (Sangam Era) सभ्यता को और उजागर करती है। उत्खनन निदेशक रमेश मत्सेतुंग ने बताया कि यह घड़ा लगभग दो मीटर गहराई पर मिला है और इसकी ऊंचाई एक फुट से भी कम है। इसका रंग लाल है और यह सही स्थिति में है। कीलाडी में मछली का चिह्न खास महत्व रखता है। संगम युग में मछली को राजवंश का प्रतीक माना जाता था।

दुर्लभ बताया जा रहा है यह घड़ा

उत्खनन की पहली खाई में करीब 160 सेंटीमीटर की गहराई पर मिट्टी का बर्तन मिला। इसका रंग लाल है। साथ ही इसका व्यास और ऊंचाई लगभग एक फुट है। बर्तन की बाहरी स्टॉक सतह पर मछली का चित्र (ग्रैफिटी) है जिसे काफी अच्छी तरह से उकेरा गया है। यह रेड स्लिप्ड वेयर श्रेणी का है, जो स्थानीय कारीगरी को दर्शाता है।

पहले भी मिली हैं दुर्लभ वस्तुएं

पहले भी कीलाडी में मछली के चिह्न वाले बर्तन के टुकड़े और मिले हैं। हालांकि उनका कहना है कि यह पूरा और अच्छी स्थिति में मिला बर्तन दुर्लभ है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस उत्तम किस्म की लाल चमकीली मिट्टी का घड़ा कीलाडी सभ्यता की उन्नत कुम्हारी कला को दर्शाती है। इसमें हैंडल भी लगे हुए हैं। वैज्ञानिक इस पर खोज करके इससे जुड़ी और बातें पता लगा सकते हैं। राज्य पुरातत्व विभाग ने पहली बार एक ही खंड में बंद ईंट की नाली, सर्पिल पाइप और मिट्टी के पाइप एक साथ ढूंढे हैं। यह खोज प्राचीन जल निकासी और संरचनात्मक तकनीक की झलक देती है। कीलाडी उत्खनन लगातार तमिल सभ्यता के गौरवशाली अतीत को उजागर कर रहा है और इस ताजा खोज ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच उत्सुकता और भी बढ़ा दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कीलाडी की खुदाई 2014 में एएसआई ने शुरू की थी। 2017 से तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग इसे संभाल रहा है।