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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला मौका नहीं…जन दबाव में पहले भी पीछे हटी है मोदी सरकार

Dharmendra Pradhan Resigns: पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के चलते धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब मोदी सरकार को जनता के दबाव में पीछे हटना पड़ा है।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 26, 2026

PM Narendra Modi and Dharmendra Pradhan

धर्मेंद्र प्रधान और पीएम नरेंद्र मोदी (File Photo)

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि उनका इस्तीफा पहला उदाहरण नहीं है जब मज़बूत कही जाने वाली मोदी सरकार (Modi Government) को मजबूरी में कदम उठाना पड़ा हो। इससे पहले भी पिछले 12 साल में कुछ मौकों पर मोदी सरकार को जनता के दबाव के कारण नरमी दिखाकर कदम पीछे खींचने पड़े हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) के नेता इसे सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही की निशानी बताते हैं है लोगों की भावना पर प्रतिक्रिया देती है। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियाँ दावा करती है कि लोगों के विरोध, विपक्षी दलों के दबाव और उनके जनता को जागरुक बनाने के प्रयासों के कारण सरकार को झुकना पड़ता है। वैसे सरकार को महिला आरक्षण-परिसीमन विधेयक पर भी संसद में दो-तिहाई बहुमत का समर्थन नहीं मिलने के कारण हार का सामना करना पड़ा था।

कब-कब पीछे हटी सरकार?

जमीन अधिग्रहण कानून (2015) - यह अध्यादेश सरकार तीन बार लाई, लेकिन हर बार इसका काफी विरोध हुआ। ऐसे में सरकार को इस संशोधन को टालना पड़ा।

अकबर का इस्तीफा (2018) - मी-टू आंदोलन और महिलाओं के विरोध को देखते हुए तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा।

एनआरसी पर पीछे हटाने पड़े कदम (2019) - सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली में कई दिनों पर प्रदर्शन चले थे। ऐसे में इससे जुड़े राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर सरकार अपने कदम पीछे हटाने के लिए मजबूर हो गई।

कृषि कानून लेने पड़े वापस (2022) - कृषि सुधार और किसानों की मदद के लिए सरकार तीन कृषि कानून लाई। हालांकि कुछ राज्यों के किसानों ने इन कानूनों का जमकर विरोध किया और कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन चले। ऐसे में सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े।

लेटरल एंट्री पर रोक (2024) - आईएएस जैसे पदों पर बिना आरक्षण निजी क्षेत्र से लेटरल भर्ती का काफी विरोध हुआ। ऐसे में सरकार को इस पर रोक लगानी पड़ी।

प्रधान का इस्तीफा (2026) - पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के चलते उन्हें शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।