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दिल्ली प्रदर्शन में ‘पेलेट गन’ का इस्तेमाल? अस्पताल की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, पुलिस के दावों पर उठे सवाल

CJP Protest: दिल्ली में संसद मार्च के दौरान घायल हुए 25 साल के प्रशांत की मेडिकल रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा। रिपोर्ट में 'पेलेट गन' (छर्रे) लगने की बात सामने आई है, जबकि पुलिस इससे इनकार कर रही है। जानिए क्या है पूरा मामला।
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CJP के संसद मार्च में घायल प्रदर्शनकारी प्रशांत ने पेलेट लगने का दावा किया | फोटो सोर्स-IANS

CJP Protest Pellet Gun: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प का मामला अब गरमा गया है। प्रदर्शन में घायल हुए 25 वर्षीय युवक प्रशांत की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मेडिकल रिपोर्ट में साफ लिखा है कि प्रशांत के शरीर पर 'पेलेट गन' (बंदूक के छर्रों) से चोटें आई हैं। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले में पेलेट गन के इस्तेमाल से साफ इनकार कर रही है।

'मुझे लगा हमेशा के लिए हाथ खराब हो गया'

मूल रूप से बिहार के रहने वाले और दिल्ली में रह रहे प्रशांत ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि 20 जुलाई को जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का संसद मार्च निकाला जा रहा था, तब जंतर-मंतर के पास अचानक झड़प शुरू हो गई। तब हि एक पेलेट जैसी चीज मेरे हाथ में आकर लगी, तो मुझे लगा कि मैं अपना हाथ हमेशा के लिए खो दूंगा। कई घंटों तक मुझे अपने हाथ में कुछ महसूस ही नहीं हो रहा था, वह पूरी तरह सुन्न हो गया था।

अस्पताल की डिस्चार्ज समरी ने खोली पोल

घायल प्रशांत को शाम करीब 4:30 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उसी दिन छुट्टी दे दी गई। अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज पेपर में साफ- साफ लिखा था कि मरीज के दाहिने हाथ, छाती और कमर के हिस्से में कई पेलेट की चोटें हैं।
शुरुआत में प्रशांत और उनके दोस्तों को लगा कि ये सामान्य घाव हैं, लेकिन जब उन्होंने डिस्चार्ज पेपर पढ़ा और इंटरनेट पर घावों का मिलान किया, तो पेलेट गन के इस्तेमाल की बात साफ हो गई। प्रशांत ने बताया कि डर और घबराहट की वजह से उन्होंने कई दिनों तक अपने परिवार को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया था।

तीन और लोगों को भी लगी थीं ऐसी ही चोटें

यह कोई इकलौता मामला नहीं है। प्रशांत से पहले तीन और लोगों को ऐसी चोटें लगने की बात सामने आ चुकी है। इनमें एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले शेख इरशाद मंसूरी, पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे छात्र साहिल लोचब और एक पत्रकार शामिल हैं, जिन्होंने अपना नाम न छापने की शर्त पर यह बात बताई थी।

जिम्मेदारी लेने से बच रही है दिल्ली पुलिस

इस पूरे मामले पर जब अस्पताल प्रशासन, दिल्ली पुलिस और CRPF से जवाब मांगने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं दिल्ली पुलिस मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के पास दंगा नियंत्रण के लिए पेलेट गन जैसे उपकरण होते हैं और संभव है कि वे प्रदर्शन के दौरान इसे साथ लाए हों। लेकिन CRPF ने इसका इस्तेमाल किया या नहीं, इस पर हम कुछ नहीं कह सकते। फिलहाल पुलिस आधिकारिक तौर पर पेलेट या रबर गन चलाने की बात से साफ मना कर रही है।

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