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स्पोक्सपर्सन के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया- विदेश मंत्रालय ने CJP प्रोटेस्ट पर वायरल दावे का किया फैक्ट-चेक

CJP Protest: विदेश मंत्रालय ने CJP प्रोटेस्ट की कथित विदेशी फंडिंग से जुड़े वायरल दावे को गुमराह करने वाला बताया। MEA ने स्पष्ट किया कि स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
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नई दिल्ली

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Saurabh Mall

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Updated: 26 Jul 2026, 5:40 PM IST

mea spokeperson

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (सोर्स: ANI)

CJP foreign funding Fact-Check: CJP प्रोटेस्ट से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक वायरल पोस्ट को भ्रामक बताया है। मंत्रालय का कहना है कि MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। एमईए ने साफ किया कि उन्होंने CJP प्रोटेस्ट की कथित विदेशी फंडिंग पर ऐसा कोई दावा नहीं किया था, जैसा सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है।

वायरल पोस्ट पर MEA की सख्त प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक यूनिट ने X पर वायरल पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि यह पोस्ट गुमराह करने वाली है। मंत्रालय के अनुसार, पोस्ट में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के नाम से ऐसा बयान जोड़ा गया जो उन्होंने कभी दिया ही नहीं।

वायरल पोस्ट में दावा किया गया था कि MEA ने जांच के आधार पर CJP प्रोटेस्ट में किसी भी विदेशी फंडिंग से इनकार किया है। लेकिन मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। MEA ने कहा कि यह बयान आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है और लोगों को भ्रमित करता है।

असल में प्रवक्ता ने क्या कहा था?

विदेश मंत्रालय ने मीडिया ब्रीफिंग का हवाला देते हुए प्रवक्ता का वास्तविक बयान भी साझा किया। रणधीर जायसवाल ने कहा था कि फिलहाल उनके पास इस विषय पर साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है। यानी उन्होंने न तो विदेशी फंडिंग से इनकार किया और न ही इसकी पुष्टि की। उनका जवाब सिर्फ इतना था कि उस समय मंत्रालय के पास सार्वजनिक रूप से बताने के लिए कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी। MEA ने दोहराया कि सोशल मीडिया पर वायरल किया गया कथित बयान पूरी तरह मनगढ़ंत है।

CJP आंदोलन का अंत और आगे की तैयारी

करीब 37 दिन तक चले CJP आंदोलन का अंत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ। NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। बाद में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े। उनकी भूख हड़ताल के बाद प्रदर्शन को और अधिक समर्थन मिला।

20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वहीं, केंद्र सरकार अब संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक में परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।

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