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Kharif season 2022: दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में गिरावट

इस साल दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। धान की बुवाई 12.39 प्रतिशत घटकर 309.79 लाख हेक्टेयर रही है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा बुवाई रकबे में गिरावट आई है। धान के अलावा दलहन और तिलहन का बुवाई रकबा भी इस साल कम है।

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Kharif season 2022: दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में गिरावट

Kharif season 2022: दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में गिरावट

Kharif season 2022: इस साल दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। धान की बुवाई 12.39 प्रतिशत घटकर 309.79 लाख हेक्टेयर रही है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा बुवाई रकबे में गिरावट आई है। धान के अलावा दलहन और तिलहन का बुवाई रकबा भी इस साल कम है। धान मुख्य खरीफ फसल है, जिसकी बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है। देश के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भाग इसी मौसम से आता है। आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा खरीफ सत्र में 12 अगस्त तक धान की बुवाई का रकबा 309.79 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले की समान अवधि में 353.62 लाख हेक्टेयर था।
झारखंड में इस साल पिछले साल के 15.25 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अब तक केवल 3.88 लाख हेक्टेयर धान बोया गया है, इसी तरह, पश्चिम बंगाल में भी धान की बुवाई पिछले साल के 35.53 लाख हेक्टेयर से घटकर 24.3 लाख हेक्टेयर में ही हुई। मध्य प्रदेश, ओडिशा, बिहार, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, त्रिपुरा, मेघालय, उत्तराखंड, कर्नाटक, गोवा, सिक्किम और मिजोरम में भी धान की बुवाई कम हुई है। इस खरीफ सत्र में अब तक दलहन और तिलहन बुवाई के रकबे में मामूली गिरावट आई है। चालू सत्र में दलहन की बुवाई का रकबा 122.11 लाख हेक्टेयर है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 127.22 लाख हेक्टेयर था। इसी अवधि के दौरान पिछले साल के 47.55 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अरहर की खेती घटकर 42 लाख हेक्टेयर रह गई है।

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मोटे-सह-पोषक अनाज की बुवाई बढ़ी
इस साल अब तक मोटे-सह-पोषक अनाज की बुवाई 166.43 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि के 161.33 लाख हेक्टेयर के रकबे से थोड़ा अधिक है। नकदी फसलों में, गन्ने का रकबा 54.52 लाख हेक्टेयर के मुकाबले बढ़कर 55.20 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि कपास की खेती का रकबा पहले के 116.15 लाख हेक्टेयर के मुकाबले बढ़कर 123.09 लाख हेक्टेयर हो गया।

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पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में कम हुई बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, इस साल एक जून से 10 अगस्त के बीच देश में कुल मिलाकर दक्षिण-पश्चिम मानसून की 8 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

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