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मीना-मीणा विवाद को लेकर किरोड़ी लाल मीणा हुए सक्रिय, सीएम गहलोत से किया ये आग्रह

मीना-मीणा को लेकर विवाद शुरू होते ही राज्यसभा सदस्य डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सक्रिय हो गए हैं।

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kirori lal meena

जयपुर। मीना-मीणा को लेकर विवाद शुरू होते ही राज्यसभा सदस्य डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सक्रिय हो गए हैं। अनुसूचित जनजाति की सूची में मीना के साथ मीणा शब्द भी जुड़वाने के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने का आग्रह करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री को फिर पत्र लिखा है। मीणा की ओर से भेजे स्मरण पत्र में कहा है कि मीना व मीणा दो अलग-अलग समुदाय नहीं हैं।

दोनों शब्दों में केवल उच्चारण का अंतर है। अब तक प्रदेश में दोनों ही शब्दों के साथ जाति प्रमाण पत्र जारी होते रहे हैं। राजस्व व शैक्षणिक रेकॉर्ड में भी मीना के बजाय अधिकांश जगह मीणा कर दिया गया है। प्रदेश में 'न' को 'ण' बोलने के कारण किसी ने मीना को मीणा लिख दिया है तो इससे उस व्यक्ति की जाति नहीं बदल जाती। विभिन्न सरकारी दस्तावेज, इतिहासकार व रीति रिवाजों का हवाला देकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मीना के साथ मीणा भी जुड़वाने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने की सिफारिश की है।

मीणा नहीं, मीना हैं एसटी में
अनुसूचित जनजाति में मीणा नहीं हैं, मीना जाति है। केन्द्र सरकार ने जनजाति आरक्षण में शामिल जातियों के लिए जारी अधिसूचना का हवाला देकर हाईकोर्ट में यह बात कही है। हाईकोर्ट ने मीणा-मीना विवाद से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करने का निर्णय किया है। अब इन याचिकाओं पर 18 फरवरी को सुनवाई होगी।

न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व न्यायाधीश गोवर्धन बाढदार की खण्डपीठ ने दुलीचंद भील व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। प्रार्थीपक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज चौधरी ने कोर्ट को बताया कि 25 अगस्त 1965 को लोकुर कमेटी ने अनुसूचित जनजाति में शामिल जातियों की सूची पेश की। उसमें पहले स्थान पर भील और दूसरे स्थान पर चौकीदार मीना जाति का नाम था। 1976 में आरक्षण का आदेश जारी हुआ तो उसकी अधिसूचना में पहले स्थान पर भील जाति को ही रखा गया, इस जाति का वर्गीकरण भी किया गया है। दूसरे स्थान पर भील मीना और नौवें स्थान पर मीना जाति को रखा गया है।

नियमित समीक्षा के निर्देश देने का आग्रह:

याचिका में आग्रह किया गया है कि जनजाति मंत्रालय को जनजाति में शामिल जातियों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया जाए। इनका सर्वे करवा राज्य सेवा के साथ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक प्रतिनिधित्व देखा जाए। केन्द्र सरकार की ओर से अधिवक्ता आनंद शर्मा ने दोहराया कि जाति प्रमाण पत्र राज्य सरकार जारी करती है। दस्तावेजों के अनुसार अनुसूचित जनजाति में मीना जाति ही शामिल है।