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गोगा नवमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गोगाजी के धोक

हनुमानगढ़ जिले के भादरा के गांव गोगामेड़ी में चल रहे उत्तर भारत के प्रसिद्ध लोक देवता गोगाजी के मेले में शनिवार को गोगा नवमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शनों के लिए उमड़ी। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व अन्य प्रदेशों के साथ -साथ राजस्थान के श्रद्धालुओं ने गोगाजी के धोक लगाकर मन्नतें मांगी।

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गोगा नवमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गोगाजी के धोक

गोगा नवमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गोगाजी के धोक

जयपुर। हनुमानगढ़ जिले के भादरा के गांव गोगामेड़ी (gogamedi) में चल रहे उत्तर भारत के प्रसिद्ध लोक देवता गोगाजी (famous folk deity gogaji) के मेले में शनिवार को गोगा नवमी (Goga Nawmi) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शनों के लिए उमड़ी। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व अन्य प्रदेशों के साथ -साथ राजस्थान के श्रद्धालुओं ने गोगाजी के धोक लगाकर मन्नतें मांगी। 24 घंटे में एक लाख 50 हजार श्रद्धालुओं तो पिछले तीन दिन में 4 लाख 50 हजार श्रद्धालुओं ने धोक लगाई। इससे पहले गोरख टीला स्थित श्रीगोरखनाथ के धूणा पर धोक लगाई। गोरख टीला पर बने तालाब में स्नान करने के बाद गोगाजी के धोक लगाई। अनेक श्रद्धालु पैदल ही गोगामेड़ी पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के समूह अपना निशान लेकर गाजे-बाजे के साथ पहुंच रहे हैं।

नंद महोत्सव में भी झलका अपार उत्साह
नाथद्वारा (राजसमंद). शुद्धाद्वेत पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी नाथद्वारा में बिराजित आराध्य प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की अपार खुशियों के बाद शनिवार को नंद महोत्सव में अपार उत्साह झलका। प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में परपंरानुसार नंद महोत्सव के अवसर पर दर्शन खुलने के बाद से ही मंदिर में केसर मिश्रित दूध व दही की मटकी लेकर ग्वाल-बाल मंदिर के रतन चौक में पहुंचने लगे। जो भी श्रद्धालु वैष्णव डोल तिबारी से ठाकुरजी के इन विशेष दर्शन कर मंदिर से बाहर निकला, उस पर केसर मिश्रित दही आदि उंडेलकर नंद महोत्सव की अपार खुशियों से जयकारे लगाए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी इस अलौकिक महोत्सव में रमते हुए पूरे मंदिर परिसर को लालो आयो रे लालो आयो रे से गुंजायमान किया।

प्रभु श्रीनाथजी के नंद महोत्सव के विशेष दर्शन प्रात: लगभग साढ़े 7 बजे खुले दर्शन के दौरान तिलकायत पुत्र विशाल बावा निज मंदिर पधारे, जहां ठाकुरजी की सेवा परंपरा पूर्ण करने के बाद नंद महोत्सव के भाव से निज मंदिर के मणि कोठे में परंपरा का निवर्हन किया गया। श्रीनाथजी के बड़े मुखिया इन्द्रवदन गिरनारा नंदबाबा बने, जबकि यशोदाजी का रूप नवनीतप्रियाजी यानि लाड़ले लालनजी मंदिर के मुखिया ने धरते हुए विशाल बावा एवं अन्य सखियोंं का रूप धरने वाले भितरिया आदि के साथ नृत्य किया।