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90 दिन में होगा 35 लाख करोड़ के निवेश के लिए जमीन आवंटन

राइजिंग राजस्थान ग्लाेबल इन्वेस्टमेंट समिट में हुए 35 लाख करोड़ रुपए के 10640 एमओयू से जुडे़ निवेश को धरातल पर उतारने का शुरुआती खाका तैयार हो चुका है। निवेशकों से संपर्क करने से लेकर भूमि आवंटन, भू-उपयोग परिवर्तन करने तक की प्रक्रिया 90 दिन में पूरी होगी। सरकार ने सभी जिला कलक्टरों की जिम्मेदारी तय कर दी है। इन्हें जनवरी से मार्च तक का होमवर्क सौंप दिया है।

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Dec 26, 2024

एमओयू के लिए जिला कलक्टरों को सौंपी कमान, जनवरी से मार्च तक के काम का फ्रेमवर्क तय

राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट

निवेशकों से संपर्क करेंगे, जमीन आवंटन, भू-उपयोग परिवर्तन व दूसरे विभाग से एनओसी लेने का होगा काम

जयपुर. राइजिंग राजस्थान ग्लाेबल इन्वेस्टमेंट समिट में हुए 35 लाख करोड़ रुपए के 10640 एमओयू से जुडे़ निवेश को धरातल पर उतारने का शुरुआती खाका तैयार हो चुका है। निवेशकों से संपर्क करने से लेकर भूमि आवंटन, भू-उपयोग परिवर्तन करने तक की प्रक्रिया 90 दिन में पूरी होगी। सरकार ने सभी जिला कलक्टरों की जिम्मेदारी तय कर दी है। इन्हें जनवरी से मार्च तक का होमवर्क सौंप दिया है।

एमओयू करने वाले ज्यादातर निवेशक, उद्यमियों ने जमीन की जरूरत जताई है। काम की समीक्षा जनवरी के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री करेंगे। इसके बाद हर 15 दिन में समीक्षा होगी। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष 11 दिसम्बर को एमओयू का हिसाब देने की बात पहले ही कह चुके हैंं।

निवेशक को जमीन आवंटन कराने तक होमवर्क

-30 जनवरी, 2025 तक- निवेशकों से संपर्क कर उनसे भूमि आवंटन के आवेदन कराना, भूमि चिह्नीकरण और साइट विजिट सुनिश्चित करना। भू-रूपांतरण सहित अन्य संबंधित कार्य।

-28 फरवरी, 2025 तक- भूमि आवंटन, भू-उपयोग परिवर्तन कराना। इसके लिए संबंधित विभागों से जुड़ी एनओसी दिलाना।

-31 मार्च, 2025 तक- भूमि आवंटन कर देंगे और उससे जुडे़ सभी मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करना।

(हर विभाग में नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो जिला कलक्टर के संपर्क में रहेगा)

निवेशकों को भी पोर्टल पर एक्सेस के अधिकार

राजनिवेश पोर्टल पर एक अलग से विंडो तैयार की गई है, जिस पर एमओयू से जुड़ी जानकारी है। जिला कलक्टर से लेकर निवेशक तक को इसे एक्सेस करने के अधिकार दिए जा रहे हैं। निवेशक जान सकेंगे कि उनके एमओयू से जुड़ी प्रक्रिया कहां तक पहुंची।

35 लाख करोड़ के एमओयू

विभाग-- निवेश (करोड़ रु.)

ऊर्जा- 26.07- 531

इंडस्ट्री- 3.28- 3675

माइन्स- 1.72- 1034

नगरीय विकास- 1.21- 637

पर्यटन- 0.74- 1156

कृषि- 0.55- 2424

शिक्षा- 0.48- 569

चिकित्सा- 0.37- 389

डीओआईटी- 0.19- 108

एविएशन- 0.11- 9

स्वायत्त शासन- 0.08- 51

अन्य- 0.18- 57

जवाबदेही भी हो तय

-सरकार ने जिला कलक्टर और नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी ताे तय कर दी है, लेकिन जरूरत जवाबदेही की भी है। यदि उद्यमी निवेश नहीं कर पाने की स्थिति बताता है तो इसके पीछे के कारण भी जानने होंगे और उसे तैयार करने के लिए प्रयास करने होंगे।

-जिन आईएएस अफसरों को राज्य और देशों की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी एमओयू करने वाले उद्यमियों से लगातार संपर्क में रहें। इससे निवेशक से संपर्क की दो लेयर तैयार होगी।

-समयबद्ध एमओयू हो, इसलिए सभी जिला कलक्टर को जिम्मेदारी दी गई है। जमीन आवंटन का काम महत्वपूर्ण है, जिसके लिए समय सीमा में काम करना होगा। हर निवेशक से संपर्क करना सुनिश्चित किया जा रहा है।

-अजिताभ शर्मा, प्रमुख शासन सचिव, उद्योग विभाग