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नेता चुनाव में मस्त, व्यापारी चंदा जुटाने में व्यस्त, सब चीजें हुई महंगी, आम आदमी हुआ पस्त

चुनाव के लिए चंदा जुटाते व्यापारी

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नेता चुनाव में मस्त, व्यापारी चंदा जुटाने में व्यस्त, सब चीजें हुई महंगी, आम आदमी हुआ पस्त

सुनील सिंह सिसोदिया / जयपुर। कहा जाता है चुनावी बाजी जीतने के लिए सबकुछ जायज है। यह कहावत भी किसी आमजन की नहीं। प्रमुख राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं की ओर से कही जाती है। इसका असर अगर किसी पर पड़ता है, तो वो है जनता। अब प्रदेश में ही देख लीजिए। चुनावी माहौल जोरों पर है। पांच दिन बाद प्रदेश में प्रथम चरण के लिए वोट पड़ेगे। लेकिन अपने आशियाने बनाने में जुटी जनता की जेब काटी जा रही है। मकान बनाने का लगभग सारा सामान महंगा कर दिया गया है। सीमेंट हो या बजरी, पत्थर की चौखट हो गया रोड़ी। चुनाई पत्थर भी मंहगा हो गया है। जो लोग मकान बनाने में जुटे थे, उन्होंने ऐसे में काम बंद कर दिया है या रफ्तार धीमी कर दी है।


बिल्डिंग मैटेरियल्स का सामान बेचने वालों की दलील है कि यह सब चुनावी चंदे का खेल है। जिन बड़े उद्यमियों ने चुनावी चंदा दिया है, वे अब जनता से वसूल रहे हैं। उनका तर्क है कि फिलहाल ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता, जिससे सामान की दरों में इतनी बढ़ोतरी हो। जब भी डीजल या अन्य चीजों में उतार-चढ़ाव आता है, तो कीमतें सामान्य तौर पर 3 से 5 रुपए तक बढ़ती हैं। लेकिन सीमेंट के कट्टे पर अचानक 40 रुपए की बढ़ोतरी किसी के गले नहीं उतरती। जयपुर में सीमेंट कट्टा जो 275 रुपए में मिल रहा था, आज 315 से 320 रुपए तक मिल रहा है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह राज्य के लगभग सभी सीमेंट कारोबारी चुनावी चंदा ही बता रहे हैं।


पत्थर की चौखट 30 नहीं, अब 45 रुपए/फीट
भवन निर्माण में दरवाजे व खिड़कियों पर लगभग सभी घरों में पत्थर की चौखट का इस्तेमाल होता है। यह चौखट पन्द्रह दिन पहले बाजार में 30 से 32 रुपए फीट तक मिल रही थी। यही चौखट अब बाजार में 44 से 45 रुपए फीट में मिल रही है। इसके पीछे कोई चुनाव होना वजह बता रहा है, तो कोई वाहनों के ओवरलोड पर सख्ती को बता रहा है। कुल मिलाकर जनता की सुनने वाला कोई नहीं हैं।

रोक के बावजूद बिक रही बजरी, वो भी महंगी
चुनावी बयार में बजरी के भाव भी आसमान छू रहे हैं। प्रदेश में यूं तो बजरी खनन पर न्यायालय की रोक है। लेकिन अवैध रूप से बड़े पैमाने पर आ रही बजरी जो चुनाव से पहले ट्रक से मंगाने पर 40 रुपए फीट तक और ट्रैक्ट्रर-ट्रॉली से मंगाने पर 55 रुपए फीट तक में मिल रही थी। वो अब ट्रक से 55 रुपए तक और ट्रैक्टर-ट्रॉली से 70 रुपए फीट तक में मिल रही है। इसके पीछे बजरी कारोबार में लगे लोगों का कहना है कि उन्हें हर थाने और सुरक्षा व्यवस्था में दौडऩे वाले वाहनों की सेवा जो करनी पड़ रही है। यदि सरकार इस 'सेवा शुल्क’ पर रोक लगा दे तो जनता को जयपुर में 15 रुपए फीट तक बजरी सस्ती दर पर मिल सकती है।


हर ईंट भी पचास पैसे तक महंगी हो गई
जो रोड़ी पहले 25 रुपए फीट थी, वो अब 30 रुपए फीट से ज्यादा कीमत पर मिल रही है। इस बढ़ोतरी के पीछे भी चुनाव का ही तर्क दिया जा रहा है। लेकिन रोड़ी बनाने वाले क्रेशर संचालक तर्क दे रहे हैं कि ओवर लोडिंग बंद करने की वजह से रोड़ी महंगी हुई है। चुनाव से ठीक पहले एक हजार ईंट 4 हजार रुपए में मिल रही थी, जो अब 500 रुपए बढकऱ 4500 रुपए में बिक रही है।

चंदे का भार
40 रुपए महंगा हुआ सीमेंट का कट्टा
15 रुपए/फीट पत्थर की चौखट मंहगी
15 रुपए/फीट दाम बढ़े बजरी के
05 रुपए/फीट बढ़ गए रोड़ी के दाम

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