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राजस्थान में संगठनात्मक तौर पर बड़े बदलाव की तैयारी में भाजपा

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राजस्थान में संगठनात्मक तौर पर बड़े बदलाव की तैयारी में भाजपा

अरविन्द शक्तावत / जयपुर। लोकसभा चुनाव से पूर्व राजस्थान में भाजपा संगठनात्मक तौर पर बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। हाल ही में पार्टी ने 15 जिलों के जिलाध्यक्षों को बदलकर इसकी शुरूआत भी कर दी है। पार्टी आठ से दस जिलों में जिलाध्यक्षों को बदलने के अलावा प्रदेश स्तर पर कई बदलाव की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी तेज हो गई है। इस गुटबाजी को रोकने के लिए पार्टी सबको साथ लेकर रणनीति बना रही है। इसके तहत जहां कुछ असंतुष्ट नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है वहीं पुराने नेताओं को संगठन की दूसरी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

जातीय समीकरण साधने के लिए बदलाव
सूत्रों के मुताबिक राज्य में भाजपा जातीय समीकरण को साधने के लिए बदलाव कर रही है ताकि पार्टी के साथ एक बड़ा वर्ग आ सके। इसके पीछे पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का तर्क है विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी को लेकर कई जातियों के नेताओं में नाराजगी देखने को मिली। इसके बाद से ही पार्टी राज्य में लगातार नेताओं की नाराजगी दूर करने में लगी हुई है।

बदलाव के लिए केंद्रीय नेतृत्व की रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन में जो भी बदलाव हुआ है या होगा उसे केंद्रीय नेतृत्व की रिपोर्ट की बाद ही फैसला किया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने हर जिलों का अलग-अलग सर्वे करा रही है ताकि किस वर्ग के नेता को क्या महत्व दिया जाना उसकी सही तस्वीर सामने आ सके। लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारी बनाए गए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर राजस्थान की एक-एक जिलों की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

नए बदलाव के बाद बदल गए जातिगत समीकरण
भाजपा ने हाल ही में 15 जिलों में अध्यक्ष बदले हैं। जयपुर ग्रामीण जिले के दो टुकडे किए हैं। इस बदलाव के बाद जो मोटी तस्वीर उभर कर आ रही है, उसमें सवर्ण जातियों को जोडने की दिशा में उठाए गए कदम दिख रहे हैं। 17—18 जिलों में वर्तमान में ब्राहृमण, 11 जिलों में वैश्य और करीब 7 जिलों में राजपूत जिला अध्यक्ष हैं। अभी कुछ जिलों में अध्यक्ष बदले जाने हैं। इसके बाद जातिगत समीकरण पूरी तरह से साफ हो जाएंगे।