
Lung Cancer
Lung Diseases : जयपुर . एक तरफ जहां भारत ( India ) में फेफड़ों की बीमारियों ( Lung Diseases ) का खतरा ( Risk ) लगातार बढ़ रहा है वहीं लंग ट्रांसप्लांट ( Lung Transplant ) को लेकर अभी भी जागरुकता ( Awareness ) की भारी कमी बनी हुई है। राजस्थान ( rajasthan ) की बात करें तो यहां गलत जीवन शैली ( Life Style ) और खराब हवा के कारण फेफड़ों की बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में गंभीर पल्मोनरी मरीजों ( Pulmonary Patients ) की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है और इसके लिए धूम्रपान ( Smoking ) और खराब हवा मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
भारत में जागरुकता के अभाव के कारण लंग ट्रांसप्लांट की तरफ अभी कम ध्यान दिया जा रहा है। देश में मुख्य रूप से आईएनडी, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस तथा लंग इन्फेक्शन के मरीज ज्यादा है। उनके फेफड़े खराब होने के बाद लंग ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल के लंग व ट्रांसप्लांट स्पंेशलिस्ट डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि एक ब्रेन डेड मरीज के विभिन्न अंगों से आठ लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। उसमें लंग ट्रांसप्लांट भी एक है। लंग ट्रांसप्लांट में ज्यादा खर्चा आना लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।
प्रदूषण से राजस्थान में बढ़ रहा है पल्मनरी रोग
फेफड़ों की बीमारियों के लिए गलत जीवन शैली भी जिम्मेदार
लंग ट्रांसप्लांट की तरफ अभी दिया जा रहा है कम ध्यान
आईएनडी, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस तथा लंग इन्फेक्शन के मरीज ज्यादा
डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि जयपुरवासी नियमित रूप से जहरीले धुएं और पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क में रहते हैं उनमें पल्मोनरी फाइब्रोसिस होने का खतरा अधिक होता है। मिसाल के तौर पर संगमरमर की खदानों और पेंट उद्योग में काम करने वाले लोगों के पास अक्सर सुरक्षात्मक उपकरण नहीं होते हैं तथा उनके लिए नियमित स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं होती है। इस तरह के बढ़ते मामलों और इन जानलेवा बीमारियों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरुक करना जरूरी है। अंतिम चरण में पहुंच चुके फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त लोगों का जीवन लंबा नहीं होता है और इन रोगियों को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए फेफड़ों का प्रत्यारोपण जरूरी होता है।
Published on:
25 Sept 2019 07:10 pm
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