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19वीं सदी में जयपुर रियासत में लगाया था पतंग का पहला कारखाना, 150 साल पहले उड़ाए जाते थे ‘तुक्कल’

दान-पुण्य और पतंगबाजी का पर्व Makar Sankranti शनिवार को मनाया जाएगा। जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से भी गुरुवार से तीन दिवसीय Jaipur Kite Festival की शुरुआत की गई।

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हर्षित जैन/ जयपुर। दानपुण्य और पतंगबाजी का पर्व Makar Sankranti शनिवार को मनाया जाएगा। संक्रांति काल रविवार को होने से दान पुण्य रविवार को होगा। भक्त आराध्य को स्पेशल पतंग-चरखी अर्पित करेंगे। वहीं, जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से भी गुरुवार से तीन दिवसीय Jaipur Kite Festival की शुरुआत की गई। सिटी पैलेस के सर्वतोभद्र चौक में विभिन्न चरखियों के साथ तितली के आकार की आदमकद पतंग ‘तुक्कल’ भी प्रदर्शित की गई। कार्यकारी ट्रस्टी रमा दत्त ने बताया कि सुबह 11.30 से दोपहर तीन बजे तक सैलानी यहां पतंगबाजी कर सकेंगे।

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सिटी पैलेस के क्यूरेटर रामकृष्ण शर्मा ने बताया कि 150 साल पहले बड़ी चर्खियों से आदमकद आकार के तुक्कल उड़ाए जाते थे। सिटी पैलेस की एक कोठरी पतंगों से भरी रहती थी। आज भी रामसिंह द्वितीय की पतंग-चरखियां यहां के म्यूजियम में सुरक्षित हैं। लखनऊ से आई Tukkal Kite थी, जो कि कपड़े से विशेष तरीके से बनाई जाती थी। धागे सूत से बनाने के साथ ही सजाने के लिए ब्लॉक प्रिंट व डाई भी किया जाता था। तत्कालीन महाराजा ने 19वीं सदी में जयपुर रियासत में खुले 36 कारखानों में पहला कारखाना पतंग का खोला था।

रियासत काल से ही जयपुर की पतंगबाजी देश-दुनिया में विख्यात है। इतिहासकारों के मुताबिक जयपुर में पतंगबाजी का इतिहास 150 वर्ष से अधिक पुराना है व इसका संबंध लखनऊ से है। जयपुर फाउंडेशन संस्थापक अध्यक्ष और इतिहासकार सियाशरण लश्करी के मुताबिक पूर्व महाराजा रामसिंह द्वितीय को पतंगबाजी का खूब शौक था। वे पतंग में चांदी के घुंघुरू बांधकर उड़ाते थे। कटी पतंग को लूटने वाले को इनाम देते थे। शाम को चांदपोल, गोविंदराव जी के रास्ते के नुक्कड़ पर भविष्य फल बताने के लिए ज्योतिषी जुटा करते थे।

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