Know on which zodiac sign will be Saade Sati and on which Dhaiya: 30 साल बाद शनि अपनी कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। 17 जनवरी को प्रवेश के साथ ही इस बात का प्रभाव भी दिखना शुरू हो जाएगा।
Know on which zodiac sign will be Saade Sati and on which Dhaiya: 30 साल बाद शनि अपनी कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। 17 जनवरी को प्रवेश के साथ ही इस बात का प्रभाव भी दिखना शुरू हो जाएगा। शनि यहां 2025 तक विराजमान रहेंगे। शनि के इसी राशि परिवर्तन के कारण कुछ राशियों पर साढ़े साती और ढैय्या शुरू हो जाएगी। तो कई राशियों पर से साढ़े साती और ढैय्या खत्म भी होगी। राशि परिवर्तन से मेष, वृषभ व धनु वालों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। कुंभ स्वराशि है ऐसे में इन्हें भी फायदा मिलेगा।
एक साल में ढाई साल रहते हैं शानि
शनिदेव ढाई साल में राशि परिवर्तन करते हैं यानि ढाई साल बाद वह एक राशि में रहने के बाद दूसरी राशि में जाते हैं। इस तरह वह 30 साल बाद दोबारा किसी राशि में पहुंचते हैं। 12 राशियों में उनका एक चक्र पूरा होने में तीस साल का समय लगता है। इस बार वह 17 जुलाई को कुंभ में प्रवेश कर रहे हैं।
शुरू होगा साढ़े साती का दूसरा चरण
शनि का कुंभ राशि में यह प्रवेश साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू करेगा। ज्योतिष में साढ़े साती के दूसरे चरण को सबसे ज्यादा खतरनाक माना गया है क्योंकि ये मानसिक, आर्थिक, शारीरिक तौर पर कष्ट देने वाला माना जाता है। हालांकि शनि कुंभ राशि के ही स्वामी हैं इसलिए उनके लिए यह समय उतना कष्टकारी नहीं रहेगा। बल्कि कुछ मामलों में कुंभ राशि वालों को शनि का यह आगमन लाभ ही देने वाला होगा। हां माना जाता है कि शनि साढ़े साती और ढैय्या के दौरान उन लोगों को ज्यादा कष्ट देते हैं, जिनकी कुंडली में शनि अशुभ का हो या फिर जिनके कर्म ठीक न हों।
तीन नक्षत्र होते हैं खास
शनि के तीन नक्षत्र खास होते हैं। पुष्य, उतरा भाद्रप्रद और अनुराधा, इसलिए जिसका भी जन्म इस नक्षत्र में हुआ है उस पर भी शनि का प्रभाव पड़ेगा। शनि के अशुभ असर को कम करने के लिए हर शनिवार शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा है। हनुमान जी की पूजा, भगवान शिव की पूजा, पीपल और शमी वृक्ष की पूजा, आठ मुखी रुद्राक्ष पहनने से शनि दोष कम होता है। शनि के कुंभ राशि में आने के बाद दुनिया में फैली अशांति कम हो सकती है। पूजा-पाठ और अच्छे काम करने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। जनता को मंहगाई से कुछ राहत मिलने के संकेत हैं। युद्ध के हालातों में सुधार होगा।