
जयपुर ।
हनुमान जयंती 2018 : भगवान शिव के 11वें अवतार पवन पुत्र हनुमान का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को हुआ था। इस दिवस को पूरे देश में हनुमान जयंती के नाम से मनाया जाता है। कहा जाता है कि इनके मात्र नाम लेने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसे में पूरे राजस्थान में इनके बहुचर्चित मंदिर हैं जहां बहुत से लोगो की मनोकामनाएं और रोग शोक दूर हो जाते है। इन्हीं मंदिरों में से एक है मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर। इस मंदिर की मान्यता इतनी है की पूरे देश भर से लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते है। बताया जाता है कि इस मंदिर में इंसान में भूत-प्रेत का वास जैसी समस्याओं को भी हनुमान जी दूर कर देते है। आइए जानते है इस मंदिर का पौराणिक इतिहास और इसकी मान्यताएं...
राजस्थान के दौसा जिले के पास मेहंदीपुर नामक स्थान है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है। साथ ही यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति ख़ुद ब ख़ुद उभर आई थी। इसी आकृति को हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है। हनुमान जी के चरणों में एक छोटी कुण्डी है जो पुराने समय से ही बनी हुई है, इस कुण्डी का जल कभी समाप्त नहीं होता है। बालाजी के मंदिर को दुष्ट आत्माओं से छुटकारा दिलाने के लिए दिव्य शक्ति से प्रेरित हनुमान जी का बहुत ही शक्तिशाली मंदिर माना जाता है। शाम के समय जब मंदिर में आरती होती है तो भूतप्रेत से पीड़ित लोगों को यहां आसानी से जूझते देखा जा सकता है।
बताया जाता है कि मेहंदीपुर में घोर जंगल था और चारों तरफ जंगली जानवरों का वास हुआ करता था। साथ ही मंदिर के आस-पास के गांव में चोर-डाकूऒ का आतंक भी फैला हुआ था। मंदिर के बाबा महंत जी महाराज के पूर्वज को एक दिन स्वप्न दिखाई दिया और स्वप्न के दौरान ही वे नींद में ही उठ कर चल दिए। इस अवस्था में बाबा ने देखा की वहां से हज़ारों दीपक जल रहे है और हाथी घोड़ो की फौज के साथ बालाजी महाराज जी, श्री प्रेतराज सरकार, श्री भैरो बाबा भी आ रहे है। उन्होंने सभी देवों को प्रणाम किया और पूरा दृश्य वहीं खड़े होकर देखा। जिस रास्ते से फौज आई थी उसी रास्ते से आगे भी चली गई। इन सब के बाद वो अपने गांव की तरफ चल दिये और सोने की कोशिश करने लगे लेकिन उन्हें बार-बार सपने का ही विचार आ रहा था।
कुछ समय बाद उन्हें नींद आ गई । नींद आते ही उन्हें वो ही तीन मूर्तियाें के साथ विशाल मंदिर भी दिखाई दिया और उनके कानों में अदृश्य आवाज आने लगी, उन्हें कोई कह रहा था बेटा उठो और मेरी सेवा, पूजा का भार ग्रहण करो। मैं कलयुग का कल्याण करूंगा। गोसाई जी महाराज डर कर इस बात पर ध्यान नहीं दिया। बाद में बालाजी महाराज ने स्वयं दर्शन दिए और कहा कि मेरी यहां स्थापना करो और पूजा करो। इसके बाद महाराज ने अपने सपने की बात अपने पास लोगों को बताई। जैसे ही सपने के बताए अनुसार खुदाई की गई वहां से प्रतिमा निकल कर आ गई। कुछ लोगों ने वहां एक छोटे से मंदिर की स्थापना करवा दी और भोग की व्यवस्था भी करवा दी। ऐसा होने से वहां चमत्कार होने लगे। कुछ कपटी और दुष्ट लोगों ने इसे ढोंग माना। बालाजी महाराज की प्रतिमा/ विग्रह जहाँ से निकाली थी, वह मूर्ति फिर से वहीं लुप्त हो गई। इससे सभी लोगों ने शक्ति को माना और क्षमा मांगी। लोगों के क्षमा मांगने के बाद मूर्तियाँ दिखाई देने लगी।
मंदिर का एक गुप्त रहस्य है कि बालाजी के ह्रदय के पास छिद्र से एक बारिक जलधारा लगातार बहती रहती है उस जल के छींटे भक्तों के लगते हैं और इसे बालाजी का आशीर्वाद माना जाता है।
राजा को नहीं हुआ यकीन, फ़िर अदृश्य हुए बालाजी
मेहंदीपुर में राजा का राज्य था, बाबा ने राजा को ही राजा को पूरी घटना के बारे में अवगत करवाया। राजा को भी ये कोई कला लगी और राजा ने इस पर यकीन करने से मना कर दिया। इससे मूर्तियां वापिस अदृश्य होकर जमीन में चली गई। राजा ने उस जगह की खुदाई करवाई लेकिन मूर्तियां नहीं मिली। इसके बाद राजा ने इसे चमत्कार माना और बाबा से क्षमा मांगी। और खुद को अज्ञानी मूर्ख बताया। इसके बाद मूर्तियाें ने वापिस दर्शन दिए।
राजा ने महाराज को पूजा का भार ग्रहण करने के आदेश दिए। इसके बाद राजा ने बालाजी महाराज का एक विशाल मन्दिर बनवाया। महंत गोसाई जी महाराज वृद्धा अवस्था तक बालाजी की सेवा की। बाद में उन्होंने बालाजी की आज्ञा से समाधि ले ली और बालाजी से अंतिम क्षण में प्रार्थना की , मेरा वंश ही आगे तक आपकी सेवा पूजा करें।
मंदिर की स्थापना से अब तक महाराज का परिवार ही सेवा कर रहा है। 1000 वर्षों के काल से अब तक यहां 11 महंत सेवा दे चुके है।
Published on:
30 Mar 2018 06:15 pm
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