
मिशिगन यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने ब्लू पॉटरी, कठपुतली पर बनाई डॉक्यूमेंट्री
जयपुर। राजस्थानी हैंडीक्राफ्ट, फोक आर्ट और उससे जुड़ी संस्कृति व इतिहास को करीब से जानने के लिए अमरीका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्रों के दल ने स्थानीय शिल्प कलाओं पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है। स्टूडेंट् एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत झालाना स्थित भारतीय शिल्प संस्थान के छात्रों के साथ मिलकर इन छात्रों ने जयपुर की ब्लू पॉट्री, जोधुपर की कठपुतली कला, सांगानेर की ब्लॉक प्रिंटिंग और जयपुर, दिल्ली और आगरा के गोल्डन ट्रायंगल के खास स्ट्रीट फूड्स पर भी शोध किया है। छात्रों की बनाई चार शॉर्ट डॉक्यूमेंट्रीज का बुधवार को शिल्प संस्थान में स्क्रीनिंग की गई। मिशिगन यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एडी बूशै ने पत्रिका प्लस से बातचीत में कहा कि वह इन छात्रों को भारत और राजस्थान में ट्यूरिस्ट की तरह नहीं बल्कि यहां के कल्चर को करीब से समझने के लिए शोधकर्ता के रूप में लाए हैं।
डॉ. बूशै ने कहा, 'ब्लू पॉटरी जयपुर की खासियत है। यह ऐसा शिल्प है, जिसकी नकल तो आसानी से मिल जाती है, लेकिन इसका नाम सिर्फ जयपुर से ही जोड़ा जाता है। कठपुतली, ब्लॉक प्रिंटिंग या स्ट्रीट फूड तो गोल्डन ट्रांयगल के विभिन्न हिस्सों में देखा जा सकता है, लेकिन ब्लू पॉटरी केवल इसी शहर में दिखाई देती है। तकनीक के इस दौर में हम हैंड क्राफ्ट के पीछे के ट्रेडिशन और एससे जुड़े इतिहास के महत्व को कम तरजीह देते हैं, इसलिए इस तरह की शिल्प के लिए आज चुनौतियां बहुत ज्यादा हैं। हालांकि, अगर लोकल आर्टिस्ट अपनी परंपराओं, ट्रेडिशन और कल्चर को अपने शिल्प में शामिल करें, तो यह उन्हें ग्लोबली पहचान दिला सकता है।'
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के चार विद्यार्थी एवं भारतीय शिल्प संस्थान के 10 विद्यार्थियों की टीम ने करीब एक महीने तक जयपुर, सांगानेर, कोटजेवर, उदयपुर, दिल्ली एवं आगरा के शिल्पकारों से मिलकर उनके काम और संस्कृति को समझा। संस्थान निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता ने बताया कि इस पहल के जरिए हम आर्टिजन्स और उनके बच्चों को यह बताना चाहते हैंं कि उनका शिल्प कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही हमारे यहां के युवा, छात्र और शिल्पकारों के बच्चे इस कला के महत्व को समझें और इसे अपनाएं।
Published on:
28 Jun 2023 07:59 pm
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