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Minor Minerals: खनिज खोज-खनन की 46 गतिविधियां होगी संचालित

वर्ष 2021-22 में राज्य में मेजर ( Mining ) व माइनर खनिजों ( Minor Minerals ) की खोज व खनन की 46 गतिविधियां संचालित की जाएगी। इनमें क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ( Geological Survey ), क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक मेपिंग ( Geological Mapping ) और डिस्ट्रिक्ट भूवैज्ञानिक मेपिंग का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही 9300 मीटर ड्रिलिंग के लक्ष्य तय किए गए हैं।

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Minor Minerals: खनिज खोज-खनन की 46 गतिविधियां होगी संचालित

Minor Minerals: खनिज खोज-खनन की 46 गतिविधियां होगी संचालित

जयपुर। वर्ष 2021-22 में राज्य में मेजर व माइनर खनिजों की खोज व खनन की 46 गतिविधियां संचालित की जाएगी। इनमें क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, क्षेत्रीय भूवैज्ञानिक मेपिंग और डिस्ट्रिक्ट भूवैज्ञानिक मेपिंग का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही 9300 मीटर ड्रिलिंग के लक्ष्य तय किए गए हैं।
राज्य में माइनर और मेजर खनिजों के विपुल भण्डार है। वर्ष 2021-22 में राज्य के माइंस व भूगर्भ विभाग, जीएसआई, एमईसीएल, एएमडी, ओएनजीसी, हिन्दुस्तान कॉपर आदि संस्थाओं से समन्वय व सहभागिता से राज्य में लेड़, जिंक, तांबा, लाइमस्टोन, डोलोमाइट, लिगनाइट, केलसाइट, क्ले, फ्लोराइट, जिप्सम, सिलिका सेंड, ग्रेनाइट, मार्बल, सेंड स्टोन, स्लेट, रेयर अर्थ आदि खनिज भण्डारों के खोज कार्य को गति दी जाएगी। राज्य में एमएडी द्वारा यूरेनियम की खोज का कार्य भी जारी है।
राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा की नीलामी की कार्ययोजना बनाई जाएगी ताकि खनिजों के खनन के साथ ही प्रदेश में नया निवेश आ सके। उन्होंने खनिज ब्लॉक्स में उपलब्ध खनिज संपदा की गुणवत्ता और उपलब्ध भण्डारों के वैज्ञानिक आंकलन के लिए एक्सपर्ट एजेंसियों की सेवाएं लेने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। जीएसआई को खनिज संपदा व खनन गतिविधियों का डाटा पोर्टल पर उपलब्ध कराकर पोर्टल को पब्लिक फ्रेण्डली और इंटरेक्टिव बनाएं। इससे देश दुनिया के लोगों को प्रदेश की खनिज संपदा की जानकारी प्राप्त होने के साथ ही निवेश बढ़ेगा और खनिज ब्लॉकों की नीलामी में अधिक राजस्व भी प्राप्त हो सकेगा।
माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव अजिताभ शर्मा ने बताया कि राज्य में खनिज संपदा की नियमानुसार रॉयल्टी के बाद सेंपलिंग की अनुमति देने की आवश्यकता प्रतिपादित की ताकि स्थान विशेष पर उपलब्ध खनिजों की गुणवत्ता की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन सकें। उन्होंने हिन्दुस्तान कॉपर के प्रस्ताव पर कॉपर क्षेत्र के ब्लॉक आवंटित करने को कहा। रामगढ़ क्रेटर, चित्तोड़ के स्ट्रोमेटोलाइट पार्क और उदयपुर के जावर माइंस के पास रिटोट को एतिहासिक धरोहर के रुप में विकसित कर माइंस विभाग द्वारा पुरातत्व, वन, पर्यटन विभाग से समन्वय बनाते हुए माइंस टूरिज्म के लिए आकर्षित किया जा सकता है।