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60 क्विंटल सामग्री से अर्पित होगी सवा करोड़ से अधिक आहुतियां

भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान और जनकल्याण के उद्देश्य से छोटीकाशी में बुधवार से विदयाधर नगर सेक्टर-8 स्थित पापड़ के हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय 108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ शुरू होगा। सुबह 6.30 बजे कलश यात्रा गौतम गार्डन सेक्टर-7 से मंदिर प्रांगण पहुंचेगी। पापड़ वाले हनुमान संत विकास समिति के निर्देशन में महंत रामसेवकदास के सान्निध्य में पूरा अनुष्ठान होगा।

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60 क्विंटल सामग्री से अर्पित होगी सवा करोड़ से अधिक आहुतियां

60 क्विंटल सामग्री से अर्पित होगी सवा करोड़ से अधिक आहुतियां

महंत ने बताया कि मंदिर प्रांगण में कनक बिहारी श्रीराम जानकी मंदिर का 11वां पाटोत्सव पर कार्यक्रम होगा।

यज्ञाचार्य पं. सतीश शर्मा ने बताया कि सबसे पहले देशभर की सात नदियों के 100 लीटर जल से शुद्धिकरण के बाद अभिषेक, गणपति स्थापना, मंडप प्रवेश होगा। सुबह 9.15 से सायं 5.15 बजे तक स्थापित देवों का नित्यार्चन, दैनिक यज्ञ एवं संतों के प्रवचन होंगे। इसके लिए खास कुंड भी बनाए गए हैं। जिनकी अलग—अलग मान्यता है। यज्ञ समिति अध्यक्ष बनवारीलाल शर्मा, शिवदयाल मिश्रा ने बताया कि कुल 225 से अधिक जोड़े अनुष्ठान में शिरकत कर प्रतिदिन सवा लाख आहुतियां देंगे। प्रवक्ता मीठालाल सामोता ने यज्ञ की पूर्णाहुति 4 मई को होगी।

खास—खास
25 क्विंटल तिल, 12.5 क्विंटल चावल, 6.25 क्विंटल जौ, 12.5 क्विंटल बूरा, यथा स्थिति घी या फिर कुल सामग्री का चौथाई, प्रत्येक 100 किलो के हिसाब से यज्ञ की अन्य सामग्री जैसे गूगल मेवे आदि।

पहला मुख्य कुंड विषम पद्म कुंड:- यह ईष्टदेव कनक बिहारी सीताराम के युगल आसन का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि में खास

2. चतस्र कुंड- यह चहुंमुखी विकास और उन्नति का द्योतक है।
3. योनि कुंड- यह वंश वृद्धि एवं शक्ति का प्रतीक है।
4. अर्ध चन्द्र कुंड - शांति का प्रतीक है। इससे अमृत्व की प्राप्ति होती है।
5. त्रिकोण कुंड- यह नैऋत्य में स्थित होता है। इससे व्याधि समापन होता है बीमारी का नाशक है।
6. सूर्य कुंड- यह तेज का द्योतक है। यह प्रभाव बढ़ाने वाला और ऊर्जा का कारक माना जाता है।
7. षडास्र कुंड- यह छह कर्मो का द्योतक है। नकारात्मक उर्जा को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने के लिए
8. अष्टास्र कुंड - यह लक्ष्मी व कुबेर का प्रतिनिधित्व करता है।
9. ईशान कुंड- यह अष्टकोणीय कुण्ड तारे की आकृति का होता है। यह शिव कृपा, ऐश्वर्य प्राप्ति और आरोग्यता के लिए विशेष महत्व रखता है।