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मां पर टूटा दुखों का पहाड़: तंगहाली से चल बसा बड़ा बेटा, अब छोटे को तिल-तिलकर मार रही बीमारी

लिवर खराब होने और इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण 25 दिन पहले बड़ा बेटा चल बसा। अब छोटा बेटा दोनों किडनियां खराब होने के कारण अस्पताल में भर्ती है।

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Kidney Transplant

जयपुर। लिवर खराब होने और इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण 25 दिन पहले बड़ा बेटा चल बसा। अब छोटा बेटा दोनों किडनियां खराब होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। मैं बेटे को किडनी देने को तैयार हूं लेकिन ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं हैं।

यह कहते-कहते 58 वर्षीय निर्मला शर्मा का गला रुंध गया। भरतपुर निवासी निर्मला का 32 वर्षीय बेटा चंद्रप्रकाश पिछले 15 दिन से एसएमएस अस्पताल में भर्ती है। वह फिलहाल डायलसिस के भरोसे है, जो हर 3 दिन में होता है। परिवार के पास हर तीसरे दिन भरतपुर से आने-जाने के भी पैसे नहीं हैं। ऐसे में कभी किसी परिचित तो कभी रिश्तेदार के घर रुक रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट ही आखिरी उपाय है।


घर चलाने वाला आखिरी बेटा
मां निर्मला ने बताया कि घर में कमाने वाला सिर्फ छोटा बेटा ही बचा है। चंद्रप्रकाश भीलवाड़ा में 10 हजार रुपए की नौकरी करता था। वहां बीमार होने पर भी इलाज नहीं कराया बल्कि घर चलाने के लिए नौकरी करता रहा। इससे उसे ब्लड प्रेशर की शिकायत होने लगी।

वहीं, बड़े भाई की मौत के बाद हाल ही परेशानी ज्यादा हुई तो जयपुर आकर एसएमएस अस्पताल में जांच कराई। जांच के बाद पता चला कि दोनों किडनी खराब हैं। एक बार का खर्च 4 हजार रुपए है।

परिवार पर टूटा कहर
दोनों किडनी खराब होने का पता चला तो परिवार पर नया कहर टूट पड़ा। मां चंद्रप्रकाश को दो बार एसएएमस अस्पताल लाई लेकिन इलाज का मोटा खर्चा सुनकर लौट गई। फिर चंद्रप्रकाश के दोस्त और परिचितों ने हिम्मत बंधाकर वापस जयपुर बुलाया। अब दोस्त ही पैसे जुटाकर डायलसिस करा रहे हैं।

टूट चुकी उम्मीद
मां निर्मला देवी का कहना है कि अब उम्मीद टूट चुकी है। कोई सहारा नहीं है। बस भगवान पर भरोसा है। दोस्त इलाज में मदद तो कर रहे हैं लेकिन ट्रांसप्लांट का खर्च वे भी वहन नहीं कर सकते।