
मां ने किया संघर्ष तो दिव्यांग बेटे ने देश विदेश में बनाई खास पहचान
जयपुर. मां बच्चों के लिए ऐसी ढाल होती है जिसकी छांव में वो चिंतामुक्त रहता है। ऐसी ही मां है मालवीय नगर डी ब्लॉक निवासी 51 वर्षीय अनुष्का आर्या पूनिया, जिन्होंने चट्टान सी खड़ी रहकर मेहनत और लगन से एक्टोडर्मल डिसप्लेसिया पीडि़त बेटे लोकेश को बुलंदियां छूने के काबिल बनाया। लोकेश के शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट के करीब रहता है, वह सुनने-बोलने में अक्षम है और उसके शरीर व सिर पर बाल नहीं हैं। 26 वर्षीय लोकेश ऐसा कलाकार है, जो सबसे कम उम्र के लोगों में शामिल है, जिन्होंने मुम्बई की जहांगीर आर्ट गैलरी में सोलो प्रदर्शनी लगाई है। लोकेश के बनाए स्कल्पचर देश - दुनिया की आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किए जा चुके हैं।
बेटे की प्रतिभा को पहचान दिलाने में जुट गई
अनुष्का आर्या ने बताया कि जब लोकेश के जन्म हुआ तो खुशी हुई लेकिन जब डॉक्टर्स ने बताया कि उसे ऐसी बीमारी है जिसका इलाज नहीं है। तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मैंने तभी ठान लिया था कि कुदरत ने चाहे उसे सामान्य नहीं बनाया लेकिन मैं उसे उस काबिल बनाऊंगी कि वो सामान्य लोगों से भी ज्यादा दुनिया में नाम रोशन करे। अनुष्का ने बताया कि वो हमेशा लोकेश के साथ ही रहती थी। कहीं भी आना जाना बंद कर दिया था। जब लोकेश बड़ा हुआ तो उसकी कला प्रतिभा का पता चला। उसके बाद उसकी कला को पहचान दिलाने की कोशिश में जुट गई। आज लोकेश के बनाए स्कल्पचर देश ही नहीं विदेशियों को भी बहुत पसंद आते हैं। इसलिए डिमांड पर स्कल्पचर बनाकर विदेश भेजे जाते हैं।
सकारात्मक सोच के बेहतरीन उदाहरण हैं स्कल्पचर
अुनुष्का ने बताया कि लोकेश बोलकर अपने भाव नहीं बताता। लोकेश अपने के बनाए स्कल्पचर के जरिए अपने मनोभाव दर्शाता है। उसकी इमेजिनेशन एक आम इंसान के परे है। वो ऐसी चीजों में भी जिंदगी ढ़ूढ़ता है जिनमें जान नहीं होती। उसके स्कल्पचर की खासियत है कि नॉन लिविंग थिंग्स में भी वो जिंदगी दर्शाता है। चिली सीरीज, सेपफ्टी पिन सीरीज और फुट सीरीज बेहतरीन उदाहरण हैं। इनमें लोकेश ने इंसान को दर्शाने की कोशिश् की है। लोकेश मुम्बई की जहांगीर आर्ट गैलरी के अलावा, नेहरू गैलरी, जवाहर कला केंद्र सहित देश की अन्य गैलरीज के साथ साथ दुबई और अन्य देशों में भी प्रदर्शनी लगा चुका है।
Published on:
12 May 2019 12:26 pm

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
