किसानों की मदद करने के लिए लॉन्च किए गए एसएलसीएम के एक एप को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता मिली है। एसएलसीएम कृषि जिंसों के लिए वैश्विक पोस्ट-हार्वेस्ट स्पेस में सेवा प्रदाताओं में से एक है। एग्रीरीच एआई एमएल क्यूसी एप्लिकेशन के अंतर्गत आता है। एग्रीरीच के लिए ये मौका इसलिए भी खास है। यह नई तकनीक, टूल्स और खेती का निरीक्षण कैसे किया जा सकता है। इसके बारे में किसानों को जानकारी देते हैं।
जयपुर। किसानों की मदद करने के लिए लॉन्च किए गए एसएलसीएम के एक एप को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता मिली है। एसएलसीएम कृषि जिंसों के लिए वैश्विक पोस्ट-हार्वेस्ट स्पेस में सेवा प्रदाताओं में से एक है। एग्रीरीच एआई एमएल क्यूसी एप्लिकेशन के अंतर्गत आता है। एग्रीरीच के लिए ये मौका इसलिए भी खास है। यह नई तकनीक, टूल्स और खेती का निरीक्षण कैसे किया जा सकता है। इसके बारे में किसानों को जानकारी देते हैं। हाल ही इस ऐप का उपयोग 17 राज्यों में 303 स्थानों पर 21.59 लाख मीट्रिक टन फसलों का निरीक्षण करने के लिए किया गया है।
रिपोर्ट्स की मानें तो ऐप पर फोटो अपलोड करने से अनाज की बाहरी परत, वो कितनी क्षतिग्रस्त है, कितने समय में पकेगी, उसका रंग, लंबाई जैसी चीजों को कुछ ही वक्त में पता चल जाएगी। फिक्की की ओर से किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शीर्ष व्यापार संघ, गोदामों में लागू सेवाओं के "एग्रीरीच" ढांचे ने फसल के बाद के नुकसान को 10 प्रतिशत के सामान्य रूप से स्वीकृत नुकसान से केवल 0.5 प्रतिशत तक कम करने में योगदान दिया है। सीईओ संदीप सभरवाल ने कहा कि प्रोफेशनल की टीम और एक लंबी प्रक्रिया के बाद हमने एग्रीरीच को तैयार किया गया है।