
राष्ट्रीय किसान दिवस आज - खेती किसानी में पुरुषों को पीछे छोड़ रही ये महिलाएं
10वीं पास संतोष बनीं किसान वैज्ञानिक
गांव का माहौल, उस पर शैक्षणिक योग्यता केवल 10वीं पास लेकिन अपने हौंसले के बल पर बन गईं किसान वैज्ञानिक। हम बात कर रहे हैं सीकर जिले के बेरी गांव की संतोष देवी की, जिन्हें किसान वैज्ञानिक के रूप जाना जाता है। संतोष साल भर में पांच बीघा जमीन ने अनार, मौसमी, नींबू और सेब की बागवानी और पौध नर्सरी से करीब 30 से 35 लाख रुपए कमाती हैं। बचपन से ही खेती से जुड़ी संतोष ने 2008 में जैविक खेती शुरू की, वह भी मजबूरी में क्योंकि उनके पति होमगार्ड थे और तीन हजार रुपए के वेतन से घर का गुजारा मुश्किल हो रहा था। ऐसे में संतोष ने अपने खेत में अनार लगाने की शुरुआत की। आज उन्होंने सेब, अनार, मौसमी और नींबू के बाग लगा रखे हैं। बागवानी के साथ साल भर में 80 हजार नर्सरी पौध भी बेचती हैं। जिससे उन्हें एक साल में 20 लाख रुपए की कमाई हो जाती है और फलों से 10 लाख रुपए की कमाई होती है।
तकनीक का सहारा
संतोष देवी कहती हैं कि उनके पास जमीन कम है, ऐसे में उन्होंने सघन बागवानी की तकनीक अपनाई है। पौधों को पानी ड्रिप इरिगेशन तकनीक से दिया जाता है। वह खुद ही जैविक खाद तैयार करती है। करती हैं। उनके बाग में देश भर से किसान विजिट करते हैं जिन्हें यहां प्रशिक्षण दिया जाता है।
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असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ बनीं किसान
रायपुर जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी दूर छोटे से गांव सिर्री (बागबाहरा) की बेटी वल्लरी चंद्राकर को खेती के प्रति जुनून इस कदर था कि वह कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोडकऱ अपने गांव आ गईं और आज लाखों रुपए कमा रही हैं। वल्लरी के मुताबिक उनके पिता रायपुर में कार्यरत थे और पैतृक गांव में उनकी जमीन थी जिसे देखने वह पिता के साथ जाया करती थीं। वहीं से उन्हें खेती के प्रति लगाव पैदा हुआ और उन्होंने तकरीबन चार एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती से अपनी शुरुआत की। उन्होंने ट्रेक्टर चलाना सीखा।
कई शहरों में सप्लाई
वल्लरी कहती हैं कि जब टमाटर से उन्हें आय होने लगी तो उन्होंने खेती को और विस्तार दिया। आज वह यहां कई तरह की सब्जियां खीरा, करेला,बैंगन, लौकी, शिमला मिर्च आदि की खेती कर रही हैं। उनके खेतों में उगाई गई सब्जियां स्थानीय मंडी के साथ दिल्ली, भोपाल्र उडिय़ा, नागपुर और बैंगलुरू जैसे शहरों में सप्लाई हो रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपना फार्म तैयार किया है, जिसमें वह काम करती हैं।
दे रही कम्प्यूटर शिक्षा
एमटेक कर चुकी वल्लरी गांव के गरीब बच्चों को निशुल्क कम्प्यूटर शिक्षा भी दे रही हैं। दिन में वह खेत संभालती हैं और शाम को बच्चों को पढ़ाती हैं। युवा सोच और ड्रीप ऐरिगेशन से सब्जी-भाजी की खेती को वल्लरी ने लाभदायक बनाया है।
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पहले सालों तक गणित पढ़ाई फिर खेती के जरिए न केवल ऑर्गेनिक फूड का कारोबार खड़ा कर दिया बल्कि 1300 से अधिक किसानों को भी अपने साथ जोड़ा। हम बात कर रहे हैं भोपाल की प्रगतिशील किसान और एंटरप्रेन्योर प्रतिभा तिवारी की जो किसानों को उनकी आय दोगुनी करने में मदद कर रही हैं। प्रतिभा बताती हैं कि शादी के बाद भोपाल आईं और वहां बतौर मैथ्स टीचर पढ़ाने लगी। पति के साथ जब कभी भोपाल से 150 किमी दूर हरड़ा जहां उनके कुछ खेत थे। धीरे-धीरे उनकी रुचि भी इस ओर होने लगी। उन्होंने जैविक खेती पर आधारित वर्कशॉप अटैंड की और एक कोर्स किया। फिर परिवार और किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। लेकिन यह आसान नहीं था क्योंकि कैमिकल खेती से जैविक खेती की ओर जाने में उपज कम होती है। जब उन्होंने खुद इसकी शुरुआत की तो उनके साथ भी यही हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
इंडोनेशिया बनाई पहुंच
आज वे किसानों को प्रशिक्षण के साथ बीज देती हैं। उन्हें औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं साथ ही ऑर्गेनिक फूड बिजनेस को और बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। 2023 को बाजरा के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने पर उन्होंने एक नई कंपनी शुरू की है, जिसमें मिलेट्स प्रोडक्ट््स पर काम किया जा रहा है। उन्होंने इंडोनेशिया की दो कम्पनियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। वह ऑर्गेनिक फूड को ग्राहकों के लिए भी किफायती बनाना चाहती हैं।
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Published on:
23 Dec 2023 03:32 pm

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