
वक्त पर पहचान तो कैंसर से बचेगी जान, सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Cancer Day: कैंसर अब सिर्फ बीमारी नहीं, समय से जुड़ी जंग बन चुका है। डॉक्टरों की दवाएं और तकनीक तभी असर दिखाती हैं, जब मरीज वक्त रहते अस्पताल पहुंच जाए। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने पर बीमारी जानलेवा हो जाती है। समय पर पहचान, सही इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति से मरीज न केवल जान बचा रहे हैं, बल्कि अपने टूटे सपनों को भी दोबारा जोड़ पा रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक देर से डायग्नोस होने पर दूसरी-तीसरी अवस्था में इलाज सीमित रह जाता है और चौथी अवस्था में मेडिकल साइंस भी कई बार बेबस नजर आती है। हालांकि, हाल के वर्षों में कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग स्क्रीनिंग करवा रहे हैं और खुलकर बात कर रहे हैं, जिससे सर्वाइवल रेट में सुधार आया है।
बचपन से टीचर बनने का सपना था और रीट की तैयारी कर रहा था। वर्ष 2022 में अचानक तबीयत बिगड़ी तो जांच में बोनमेरो कैंसर का पता चला। एक पल में सब कुछ बिखर गया और मैं तनावग्रस्त हो गया। जैसे-तैसे खुद को संभाला और डॉक्टरों पर भरोसा किया। समय पर बीमारी की पहचान हुई तो पूरी हिम्मत से मुकाबला किया और उसे हरा दिया। चार महीने पहले रिपोर्ट में कैंसर से मुक्ति की पुष्टि हुई। अब फिर से अपने सपने को पूरा करने में जुट गया हूं।
छह साल पहले सेकंड स्टेज ब्रेस्ट कैंसर का पता चला तो जोर का शॉक लगा। डर और अनिश्चितता के बीच परिवार और डॉक्टरों ने हौसला दिया। मैंने तय किया कि बीमारी से हार नहीं मानूंगी। सर्जरी तक कैंसर थर्ड स्टेज में पहुंच चुका था और कोरोना भी पीक पर था। थैरेपी और साइड इफेक्ट्स के बावजूद लड़ती रही और आखिरकार कैंसर को हरा दिया। आज चार साल से सामान्य, बल्कि पहले से बेहतर जिंदगी जी रही हूं और दूसरे मरीजों को भी मोटिवेट कर रही हूं।
आठ साल की उम्र में मुझे ब्लड कैंसर हो गया। इलाज के दौरान थैरेपी का असहनीय दर्द और साइड इफेक्ट झेले। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में लंबे समय तक भर्ती रहना पड़ा और सातवीं कक्षा की पढ़ाई छूट गई। बीमारी और पढ़ाई छूटने का दर्द साथ-साथ रहा। पिछले साल डॉक्टरों ने कैंसर से मुक्त होने की पुष्टि की। इसके बाद 13 साल की उम्र में गांव के सरकारी स्कूल में दोबारा सातवीं में एडमिशन लिया। अब पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रही हूं और डॉक्टर बनकर कैंसर मरीजों की सेवा करना चाहती हूं।
कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इससे मुक्त होने की संभावना 95 फीसदी तक रहती है। बाद की अवस्थाओं में इलाज का मकसद बीमारी को बढ़ने से रोकना होता है। कैंसर से लड़ाई में जल्दी डायग्नोस, स्क्रीनिंग, सही इलाज, मजबूत इच्छाशक्ति और परिजनों का सहयोग सबसे अहम है।
Published on:
04 Feb 2026 08:39 am

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