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फोगाट बेटियों की तरह यह लाडो भी पिता की विरासत को बढ़ा रही हैं आगे

राष्ट्रीय जूनियर कुश्ती: हरियाणा की अंशु व टीना मलिक एशियन चैम्पियनशिप में जीत चुकी हैं पदक
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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 22 Feb 2018, 8:00 PM IST

jaipur

मृदुला शर्मा / जयपुर . वो बीते जमाने की बात हो गई जब एक बेटा अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाता था, वर्तमान में बेटियां भी अपने पिता के नाम को आगे बढ़ाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। एेसी ही दो महिला पहलवान यहां सवाई मानसिंह इंडोर स्टेडियम में गुरुवार से शुरू हुई राष्ट्रीय जूनियर कुश्ती चैम्पियनशिप में शिरकत कर रही हैं। ये हैं हरियाणा की अंशु मलिक और टीना मलिक। अंशु और टीना दोनों के ही पिता राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और ये दोनों ही अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

गांव में 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान

हरियाणा के जींद जिले की निवासी अंशु बताती हैं कि उनके गांव में कुश्ती का सेंटर चलता है, जहां नियमित रूप से 80 से अधिक महिला पहलवान अभ्यास करने आती हैं। उनमें से करीब 40 पहलवान राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शिरकत करती हैं। अंशु ने बताया कि उनके दादाजी, ताऊजी और पिता पहलवान रहे हैं, इसलिए बचपन में ही तय हो गया था कि उन्हें कुश्ती सिखाई जाएगी।

2016 व 2018 एशियन जूनियर चैम्पियनशिप में 60 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में क्रमश: रजत व कांस्य पदक जीत चुकी अंशु ने कहा कि हमें कभी समाज या गांव वालों के ताने सुनने को नहीं मिले। हमारे गांव में कुश्ती का बहुत अच्छा माहौल है। अंशु के पिता धर्मवीर ने भी कहा कि वर्तमान में पहलवानों को काफी सुविधाएं मिलने लगी हैं जिससे उनका सफर थोड़ा आसान हो गया है। धर्मवीर ने बताया कि अंशु के जन्म से ही मैंने तय कर लिया था कि मैं अपनी बेटी को पहलवान ही बनाऊंगा।

साक्षी मलिक की रूममेट हैं टीना

गत वर्ष बैंकाक में एशियन जूनियर चैम्पियनशिप के 65 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुकीं हरियाणा की टीना मलिक रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक की रूममेट हैं। टीना ने बताया कि रोहतक में साई सेंटर में मैं साक्षी दीदी के साथ एक ही कमरे में रहती हूं। उन्होंने मुझे काफी कुछ सिखाया है, जिसका फायदा मुझे एशियन चैम्पियनशिप में मिला। टीना के पिता सत्यवान मलिक भी राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं। स्कूल नेशनल, कैडेट व पायका नेशनल में अब तक आठ स्वर्ण पदक जीत चुकी टीना ने कहा, पिता पहलवान थे तो बचपन से ही हमें कुश्ती के दाव पेंच सीखने को मिले और अब यही हमारा भविष्य है। ओलंपिक में पदक जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहीं टीना ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कुश्ती में लड़कियों का रुझान बढ़ा है और दंगल फिल्म आने के बाद तो कुश्ती के प्रति लोगों का नजरिया ही बदल गया है।