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51 शक्तिपीठों में से एक है मां कात्यायनी ,जहां गिरे थे माता सती के केश

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा होती है। कहते हैं मां जगदम्बा की भक्ति पाने के लिए नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी का जाप करना जरूरी है।
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जयपुर

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kamlesh sharma

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Updated: 1 Oct 2022, 12:55 PM IST

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नूपुर शर्मा
जयपुर। नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी पूजा करने से अद्भुत शक्ति मिलती है और ये शत्रुओं का नाश भी हो जाता हैं। मां दुर्गा का यह छठा रूप अत्यंत दयालु भरा है। ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा ने अपने भक्तों की तपस्या को सफल करने के लिए यह रूप धारण किया था। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा होती है। कहते हैं मां जगदम्बा की भक्ति पाने के लिए नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी का जाप करना जरूरी है।


माँ भगवती को क्यों कहते है मां कात्यायनी
पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि कात्यायन की तीन पीढ़ियों से कोई कन्या उत्पन्न नहीं हुई और वे आदिशक्ति (दुर्गा) के पुजारी थे, वे चाहते थे कि उनके घर में माता भगवती पुत्री के रूप में जन्म लें, और इसी तरह देवी दुर्गा की कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने महर्षि के सामने प्रकट होकर वर मांगने को कहा जब महर्षि कात्यायन ने कहा कि मेरी इच्छा है कि मेरे घर में माता भगवती पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। और अश्विन ने कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लिया। जब माता भगवती के पिता महर्षि कात्यायन हुए तो उनका नाम कात्यायनी पड़ा। यह भी कहा जाता है कि महिषासुर को मारने के लिए देवी का जन्म हुआ था। दसवें दिन मां कात्यायनी में महिषासुर का वध किया था। माता कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था, तब से उन्हें महिषासुर मर्दानी भी कहा जाता है।

बौद्ध और जैन ग्रंथों में है माँ का उल्लेख
मां कात्यायनी का उल्लेख हिंदू धर्म की किताबों के साथ-साथ बौद्ध और जैन ग्रंथों में भी मिलता है। यजुर्वेद, स्कंद पुराण, पाणिनी, महाभाष्य, देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी माता का उल्लेख मिलता है, जिसमें उन्होंने माता पार्वती को कात्यायनी माता बताया है और सिंह पर सवार महिषासुर के वध की कथा कही है। यह भी बताया जाता है कि वह शक्ति का मूल रूप हैं। वह भगवान के प्राकृतिक क्रोध से पैदा हुई थी।

कहा गिरे थे माता सती के केश
श्री कात्यायनी शक्ति पीठ भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। श्रीमद्भागवत में महर्षि वेद व्यास ने श्री कात्यायनी शक्तिपीठ के बारे में बताया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जिस स्थान पर कात्यायनी शक्ति पीठ स्थित है, उस स्थान पर माता सती के केश गिरे थे । लोगों का मानना है की राधारानी ने भी भगवान कृष्ण को अपने वर रूप में पाने के लिए कात्यायनी माता की पूजा की थी। कात्यायनी शक्ति पीठ वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जो वृंदावन में राधाबाग के पास है।

मां कात्यायनी देवी के प्रसिद्ध मंदिर
मां कात्यायनी देवी मंदिर नई दिल्ली के छतरपुर में स्थित है, जो मां सती के शक्तिपीठों में से एक है। भक्तों के अनुसार, नवरात्रि की छठी तिथि को माता कात्यायनी मंदिर में विशेष पूजा की जाती है और लोगों को माता पर विश्वास है कि माता के दर्शन मात्र से ही माता सभी के दुख दूर कर देती है।

मेरठ के परीक्षितगढ़ क्षेत्र में माता कात्यायनी देवी का मंदिर है। इस मंदिर के निर्माण की एक कहानी है, माता कात्यायनी ने स्वयं राजा नैन सिंह को सपने में आकर मंदिर का निर्माण कराने के लिए कहा था। उसी सपने के आधार पर राजा ने क्षेत्र में खुदाई की, तब यहां माता की मूर्ति मिली फिर मंदिर का निर्माण किया गया। सदियों से यह मंदिर भक्तों की मनोकामना पूरी करने का स्थान बना हुआ है, यहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि मां सभी की मनोकामनाएं पूरी करती है।

माँ कात्यायनी मंदिर एक और है जो उत्तर प्रदेश के खैरगढ़ में स्थित है। भक्तों का मानना है कि जो कोई भी सच्चे मन से मां की पूजा करता है उसके रोग, शोक, पीड़ा, भय आदि का पूरी तरह से नाश हो जाता है। जन्म-जन्मान्तर के पापों का नाश करने के लिए माता के पास जाता है।

डिस्केलमर - यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है पत्रिका इस बारे में कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।