अलवर के वीर सावरकर नगर निवासी नीरज मीणा ने बैंक में काम करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा चयन परीक्षा में सफलता प्राप्त की। उसने परीक्ष में 1135 वां स्थान पाया है।
नीरज के पिता विश्राम लाल मीणा राजकीय कला महाविद्यालय में अर्थशास्त्र के व्याख्याता हैं। मां शकुंतला मीणा है। नीरज ने बताया कि वह तीन वर्ष से आईएएस चयन परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इससे पहले उसने दिल्ली में रहकर कोचिंग की।
मेहनत का कोई विकल्प नहीं
नीरज का कहना है कि आईएएस चयन परीक्षा में यह बात मायने नहीं रखती कि आप किस कॉलेज या स्कूल में पढ़े हैं। वहां बस आपकी मेहनत और विषय पर कमांड मायने रखती है। यदि एक वर्ष आईएएस में चयन नहीं हुआ तो तत्काल ही अगली परीक्षा की तैयारी में लगना होता है। इस परीक्षा में मात्र मेहनत ही विकल्प है। नए प्रतियोगियों को जम कर तैयारी करनी चाहिए, जिससे उन्हें सफलता मिल सके।
मम्मी-पापा ने कहा, सफलता एक दिन जरूर मिलेगी
नीरज ने बताया कि मम्मी-पापा हमेशा निराश नहीं होने और आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती रही। मम्मी कहती थी कि बेटा जब निराशा अधिक होने लगे तो और अधिक मेहनत में जुट जाना चाहिए। एेसे समय में सफलता बहुत पास होती है।