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ठूंठ को जीवित रखा हरे-भरे पेड़ों ने

इस ठूंठ को आसपास के हरे पत्तेदार पेड़-पौधों ने लंबे समय से जीवित रखा हुआ है क्योंकि इस ठूंठ की जड़ों ने नजदीक के पेड़ों की जड़ों को थामा हुआ है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jul 31, 2019

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ठूंठ को जीवित रखा हरे-भरे पेड़ों ने

न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप में कौरी वन में स्थित एक पेड़ की ठूंठ ने इस बात के प्रमाण उपलब्ध कराए हैं कि पेड़-पौधे आपस में काफी मेल-जोल के साथ रहते हैं। पेड़ की यह ठूंठ वैज्ञानिकों को अचानक ही नजर आई। असल में इस ठूंठ को आसपास के हरे पत्तेदार पेड़-पौधों ने लंबे समय से जीवित रखा हुआ है क्योंकि इस ठूंठ की जड़ों ने नजदीक के पेड़ों की जड़ों को थामा हुआ है। यह ठूंठ 50 मीटर लंबी और 15 मीटर आकार में चौड़ी है, जो कि प्राचीन विशाल (अगथिस ऑस्ट्रलिस) दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी पेड़ प्रजाति है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में यह पाया कि पेड़ आसपास के पेड़ों को बूढ़ा होने या मृत होने से बचाने के लिए उनकी जड़ों को थामे रखते हैं। यह अध्ययन जर्नल आईसाइंस में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर कौरी पाइन ट्री से जुड़ा उनका यह तर्क सही साबित हुआ तो इस थ्योरी में नई चीजें जुड़ जाएंगी कि जंगल किस प्रकार से काम करते हैं।
एक लोकप्रिय पैदल ट्रैक पर ब्रेक लेने के दौरान, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के दो वैज्ञानिकों डॉ. सेबस्टियन ल्यूजिंगर और उनके सहयोगी मार्टिन बेडर को यह असामान्य ठूंठ नजर आई। डॉ. सेबस्टियन ल्यूजिंगर ने कहा कि 99 फीसदी आबादी शायद इसे देखकर पार कर जाए और समझे कि यह एक ठूंठ है। लेकिन जब इसे ध्यान से देखा तो हमें इस पर रंग नजर आए, तब इस बात का यकीन हो गया कि यह मृत नहीं है। लेकिन तभी दिमाग में यह खयाल आया कि हरे पत्तों के बिना एक पेड़ ने कैसे खुद को जीवित रखा हुआ है? यह खोज ऑस्ट्रेलिया में एक पुराने पेड़ से शुरू हुई थी, जो पत्तियों के बिना भी जीवित पाया गया था। इस पेड़ के संबंध में वैज्ञानिकों ने कहा कि यह अन्य पेड़ों से शर्करा प्राप्त कर रहा था।


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