
जयपुर। प्रदेश में सहित देशभर में कैश की किल्लत से जूझ रहे लोगों को एक बड़ा झटका लगने वाला है। देश के 11 राज्यों में पहले ही कैश की कमी से लोग परेशान है अब ये खबर उनके लिए ओर परेशानी खड़ी कर सकती है। 5 से अधिक एटीएम ट्रांजेक्शन करने वाले ग्राहकों को आगे चलकर 20 रुपए प्रति ट्रांजेक्शन खर्च करने पड़ सकते हैं। रिजर्व बैंक ने एटीएम पर होने वाले ट्रांजेक्शन के लिए काफी कड़े नियम बना दिए हैं, जिसके बाद एटीएम ऑपरेटर्स ट्रांजेक्शन चार्ज बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। एटीएम इंडस्ट्री ने ट्रांजेक्शन पर 3-5 रुपये बढ़ाने की मांग की है, ताकि वो अपने खर्चों को पूरा कर सके। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वो नए नियमों को जुलाई तक लागू कर दें।
कैश की किल्लत खत्म होने में लग सकते हैं अभी और दो हफ्ते
सरकार के दावे के विपरीत कैश संकट से जूझ रहे देश के कई हिस्सों को पूरी तरह से राहत कम से कम दो हफ्तों में मिल सकेगी। हो सकता है कि इसमें छह सप्ताह तक लग जाएं। दअसल अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि डिमांड पूरी करने के लिए अतिरिक्त 70 हजार करोड़ से लेकर एक लाख करोड़ रुपए तक के नोट छापने में आरबीआइ के छापाखानों को इतना वक्त तो लग ही जाएगा। कैश के किल्लत की स्थिति सबसे पहले अप्रैल की शुरुआत में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में शुरू हुई थी और जल्द ही यह देश के दूसरे इलाकों तक पहुंच गई।
पांच गुना बढ़ेगी 500 रुपए के नोटों की प्रिंटिंग
सरकार ने कहा है कि वह 500 रुपए के नोटों की प्रिंटिंग पांच गुना बढ़ाएगी। भारत में चार सिक्यॉरिटी प्रिंटिंग प्रेस हैं। मैसूर और सालबनी के प्रेस आरबीआइ के पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड चलाती है। इन दोनों में 500 रुपए के नोट छापे जाते हैं। अगर दोनों शिफ्ट्स में काम हो तो ये दोनों प्रेस हर साल बैंक नोट के 1600 करोड़ पीस छाप सकते हैं। 70 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित कमी है। अगर यह मान लें कि यह पूरा अंतर केवल 500 रुपए के नोटों की छपाई से घटाया जाएगा तो देश को लगभग 140 करोड़ अतिरिक्त बैंक नोटों की जरूरत होगी। ऐसे में मैसूर व सालबनी के छापाखानों को इन्हें छापने में कम से कम दो हफ्ते लगेंगे।
राजस्थान के ये जिले रहे प्रभावित
राजस्थान के नागौर, सीकर, बूंदी, दौसा, झालावाड़, बांसवाड़ा, श्रीगंगानगर सहित दर्जन भर जिलों सहित देश में दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, गुजरात समेत कई राज्यों में एक बार फिर नोटबंदी जैसा नकदी संकट देखने को मिल रहा है। अक्षय तृतीया पर शादी विवाह के अबूझ मुहूर्त के कारण यह समस्या और विकट हो गई थी। इन राज्यों के कई शहरों में या तो एटीएम से पैसे नहीं निकले या बैंकों से लोगों को वापस लौटना पड़।
अघोषित नोटबंदी का दौर
ऐसा लगने लगा है कि एक बार फिर से देश में नोटबंदी का दौर शुरू हो गया है। कई राज्यों में नो कैश के बोर्ड लगे एटीएम ने लोगों को परेशान कर दिया है। यह समस्या 2000 हजार के नोटों के जमा होने से पैदा हुई है। जिसे कालेधन के रूप में लोगों ने अपने पास दबा लिया है। ऐसे हालातों को देखते हुए एक बार फिर से नोटबंदी हो सकती है!
Published on:
20 Apr 2018 02:22 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
