
complex surgery
जयपुर. राज्य कैबिनेट में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम 1965 के अंतर्गत फिजियोथैरेपिस्ट से संवर्ग की योग्यता में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन विवादों में आ गया है। इसके अनुसार अब डिप्लोमा के साथ सीनियर सैकंडरी बायोलॉजी साइंस और राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से बैचलर इन फिजियोथैरेपिस्ट कोर्स को सीधी भर्ती के लिए मान्य किया गया है। राज्य में 35 वर्ष से डिप्लोमा कोर्स संचालित ही नहीं है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 1988 में ही फिजियोथैरेपी में डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिया गया था। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से भी डीपीटी कोर्स अपनी स्थापना 2006 से संचालित नहीं किया जा रहा।
राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और अन्य डीम्ड यूनिवर्सिटियों के अंतर्गत फिजियोथैरेपी पेशे में बीपीटी, एमपीटी और पीएचडी कोर्स करवाए जा रहे हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से वर्ष 2011 में फिजियोथैरेपिस्ट के 36 पद और वर्ष 2018 में 28 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की गई। इनमें आवेदनकर्ता भी डिग्री धारी थे और चयनित करने वाले सारे अभ्यर्थी डिग्री योग्यता धारी थे, इनमें कोई डिप्लोमाधारी नहीं था। राजस्थान चार्टर्ड एसोसिएशन आफ फिजियोथैरेपी ने वर्ष 2020 में ज्ञापन देकर सीनियर सैकंडरी प्लस बैचलर डिग्री के लिए मांग की थी।
फर्जी डिग्रियां लाने वाले पनपेंगे
नेशनल कमीशन एलाइड एंड हेल्थ प्रोफेशनल बिल एक्ट 2021 लागू किया गया था। इसमें न्यूनतम योग्यता बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी रखी गई है। एम्स की गाइडलाइन के अनुसार भी न्यूनतम योग्यता बीपीटी है। डिग्री के साथ डिप्लोमा जोड़ने पर डिग्री करने वाले अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। सरकारी नौकरी लगने में भी दिक्कत आएगी। अन्य राज्यों से गैर डिप्लोमाधारी फर्जी डिग्री लाकर आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करेंगे।
डॉ.संजय कुमावत, अध्यक्ष, राजस्थान चार्टर्ड एसोसिएशन आफ फिजियोथैरेपी
Published on:
26 Sept 2023 01:04 pm
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