
jantar mantar
अगर आपको इंग्लिश, फ्रेंच, स्पेनिश और चाइनीज जैसी लैंग्वेज आती है, तो आप जंतर-मंतर की आसानी से सैर कर सकते हैं, साथ ही आप आसानी से जरूरी जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं और अगर ये चारों लैंग्वेज नहीं आती, तो आपको कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं शहर में स्थित खगोलिया वेधशाला जंतर-मंतर की। यहां आपको इंग्लिश, फ्रेंच, स्पेनिश और चाइनीज जैसी लैंग्वेज में तो ऑडियो गाइड की सुविधा मिल जाएगी, लेकिन हिंदी में जंतर-मंतर पर ऑडियो गाइड की कोई व्यवस्था नहीं है। गौरतलब है कि जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1728 से 1734 के बीच जंतर-मंतर का निर्माण करवाया था। इस वेधशाला में 18 प्रमुख यन्त्र हैं, जो समय मापने, ग्रहण की भविष्यवाणी करने, किसी तारे की गति एवं स्थिति जानने, सौर मंडल के ग्रहों के दिक्पात जानने आदि में सहायक हैं। जंतर-मंतर को 2010 में यूनेस्को के 'विश्व धरोहर सूची' में भी शामिल किया गया है।
जंतर-मंतर देखने देश-विदेश के कोनों-कोनों से लाखों टूरिस्ट्स हर साल यहां आते हैं। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखकर और टूरिस्ट्स को इस ऐतिहासिक धरोहर की जानकारी देने के उद्देश्य से प्रशासन ने यहां इंग्लिश, फ्रेंच, स्पेनिश और चाइनीज लैंग्वेज में तो ऑडियो गाइड लगवाया है, लेकिन राष्ट्रभाषा हिंदी को दरकिनार करते हुए यहां हिंदी में ऑडियो गाइड की कोई व्यवस्था ही नहीं है। जबकि जंतर-मंतर पर आने वाले ज्यादातर सैलानी देसी है, ऐसे में देसी पर्यटकों को हिंदी ऑडियो गाइड के अभाव में लोकल गाइड हायर करने पड़ते हैं।
इस संबंध में जंतर-मंतर अधीक्षक शशि प्रभा स्वामी का कहना है कि हिंदी में ऑडियो गाइड की ज्यादा डिमांड नहीं है। जिन्हें हिंदी में जानकारी चाहिए होती है, ऐसे पर्यटक गाइड हायर कर लेते हैं। और रही बात हिंदी ऑडियो गाइड की तो मैं इस मुद्दे को जल्द ही विभाग के सामने रखूंगी।
Published on:
17 Oct 2018 05:14 pm
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