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कोविड के दौरान पांच हजार बच्चों ने खो दिए माता-पिता को, सरकार अब तक तैयार ही नहीं कर पाई गाइडलाइन

  - केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फंड की गाइडलाइन भी अब तक नहीं आई - राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कोरोना बाल कल्याण योजना की गाइडलाइन भी फाइनेंस विभाग में अटकी

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जयपुर

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Jaya Gupta

Jun 25, 2021

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जया गुप्ता

जयपुर। कोविड की दूसरी लहर का प्रकोप भले ही अब थम चुका हो मगर इसने निशान बेहद गहरे छोड़े हैं। खासकर, उन बच्चों पर जिनके माता-पिता दोनों या दोनों में से एक को कोरोना ने छीन लिया। अभी तक बाल अधिकारिता विभाग ऐसे बच्चों के आंकड़ों का सही पता भी नहीं लगा पाया है। अभी तक के सर्वे में पूरे प्रदेश में ऐसे करीब पांच हजार बच्चे सामने आए हैं, जिनके माता-पिता दोनों या दोनों में एक की मौत कोरोना के दौरान हो गई। इनमें के 250 से अधिक बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया है, वहीं 4600 से अधिक बच्चों ऐसे मिले हैं, जिनके माता-पिता में से एक की मौत हो गई। अब बच्चों के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

कहने को तो केंद्र व राज्य दोनों सरकारों ने इन अनाथ व बेसहारा बच्चों के लिए योजनाएं लॉन्च कर दी मगर अब तक दोनों में से किसी ने भी योजना की गाइडलाइन तैयार नहीं की है। गाइडलाइन के अभाव में अब तक यहीं नहीं पता लग पा रहा है कि इन योजनाओं को लाभ बच्चों को कैसे मिलेगा?

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केंद्र सरकार – पीएम केयर्स फंड में बनाया जाएगा हर बच्चे के लिए दस लाख का कोष

केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फंड के तहत अनाथ बच्चों (जिनके माता-पिता दोनों की मौत कोरोना के कारण हो गई) दस लाख का कोष बनाने की घोषणा करीब 25 दिन पहले की गई थी। अभी तक राज्य सरकार को इस योजना के क्रियान्वन को कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। इस योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाया जाएगा। इस कोष का उपयोग 18 वर्ष की आयु से अगले पांच वर्षों तक उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए मासिक वित्तीय सहायता / छात्रवृति देने के लिए उपयोग किया जाएगा। 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर, उसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त के रूप से कोष की राशि मिलेगी। वहीं 11 से 18 साल के बच्चे को नजदीकी केन्द्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिलाया जाएगा। अगर बच्चे का दाखिला किसी निजी स्कूल में होता है तो पीएम केयर्स से आरटीई के नियमों के मुताबिक फीस दी जाएगी। पीएम केयर्स वर्दी, पाठ्य पुस्तकों और नोटबुक पर होने वाले खर्च का भी भुगतान करेगा।

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राज्य सरकार – मुख्यमंत्री कोरोना बाल कल्याण योजना

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कोरोना बाल कल्याण योजना की घोषणा की थी। कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को तत्काल सहायता के रूप में एक लाख रूपये का एकमुश्त अनुदान तथा 18 वर्ष के पूरे होने तक 2,500 रुपये की राशि प्रतिमाह दी जाएगी। 18 साल की आयु पूरी करने के बाद 5 लाख रूपये की एकमुश्त सहायता, पढ़ाई के लिए आवासीय विद्यालय व छात्रावास में प्राथमिकता से प्रवेश। युवाओं को मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के अन्तर्गत बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। वहीं कोविड से पति की मृत्यु होने की स्थिति में विधवा महिलाओं एवं उनके बच्चों को सहायता दी जाएगी। विधवा महिला को एक लाख रुपए की एक-मुश्त सहायता एवं प्रति माह 1500 रुपए विधवा पेंशन (सालाना आय की अनिवार्यता एवं सभी आयु वर्ग की महिलाओं को) व विधवा महिलाओं के बच्चों को एक हजार रुपए प्रति बच्चा प्रति माह तथा स्कूल यूनिफॉर्म व किताबों के लिए सालाना दो हजार रुपए का लाभ दिया जाएगा। इस योजना के दिशा-निर्देश भी अब तक जारी नहीं किए हैं।

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जिन बच्चों की मां मर गई, केवल पिता बचे, उनके लिए न केंद्र सरकार की योजना न राज्य की

केंद्र सरकार ने केवल उन बच्चों के लिए कोष बनाने की घोषणा की है, जिनके माता-पिता दोनों की मौत हो गई और वे अनाथ हो गए। वहीं राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों के साथ उन बच्चों के लिए भी घोषणा की है जिनके पिता की मौत हो गई और मां बची है। मगर दोनों सरकारें ऐसे बच्चों को भूल गई, जिनकी मां चल बसी और अब पिता बचे हैं। एकल पिता वाले बच्चे सरकार की नजर में बेसहारा नहीं हैं।

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बच्चों की व्यथा ऐसी, जो सुने आंखों में आंसू आ जाए

केस 1 – एसएमएस अस्पताल में संक्रमित कचरा उठाने वाली पूजा की मौत पिछले साल ही कोरोना के कारण हो गई थी। पूजा का पति 40 वर्षीय आनंद मानसिक बीमार है। अब घर में अस्सी साल की दादी, पूजा की 15 व 11 साल की दो बेटियां, 9 साल का बेटा बचा है। खातीपुरा रोड हसनपुरा नाला कच्ची बस्ती में रह रहे परिवार के पास केवल दादी की 750 वृद्धावस्था पेंशन ही एकमात्र सहारा है। पढ़ाई तो दूर खाना भी दुभर हो रहा है।

केस 2 - गुर्जर की थडी स्थित बाबा रामदेव कच्ची बस्ती में 85 वर्ष की दादी पर 16 वर्ष, 12 वर्ष, 10 वर्ष व 8 वर्ष के बच्चों की जिम्मेदारी है। मगर अब दादी को भी कैंसर भी हो चुका है। बच्चों को माता-पिता दोनों की मौत हो गई। नतीजा, अब बच्चे बालश्रम करने या भीख मांगने को मजबूर हैं।

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वर्जन –

- केंद्र सरकार की गाइडलाइन नहीं आई है, मुख्यमंत्री कोरोना बाल कल्याण योजना की गाइडलाइन तैयार कर वित्त विभाग को भेज दी है। बच्चों की सही संख्या पता लगाने के लिए सर्वे करवा रहे हैं।

- ओ पी बुनकर, निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

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