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शरीर में लगातार दर्द और थकान है, हो सकता है Fibromyalgia

-ज्यादातर महिलाओं में पाई जाती यह बीमारी-थकान, नींद और खराब मूड जैसी कई समस्याएं शामिल

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जयपुर

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Tasneem Khan

Feb 25, 2021

There is constant pain and fatigue in the body, may cause fibromyalgia

There is constant pain and fatigue in the body, may cause fibromyalgia

Jaipur दौड़भाग भरी दिनचर्या के बाद सुकून की नींद लेने से काफी आराम मिलता है, लेकिन जब पर्याप्त आराम करने के बाद भी शरीर में दर्द या थकान बना रहे तो यह फ्राइब्रोमायल्जिया बीमारी के संकेत हो सकता है। फाइब्रोमायल्जिया या फाइब्रोमायल्जिया सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जो पूरे शरीर में दर्द का कारण बनती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज अत्यधिक थकान या नींद, मूड या याद्दाश्त संबंधी समस्याओं जैसे लक्षणों का सामना करते हैं। पुरुषों की तुलना में फाइब्रोमाइल्जिया महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है। इसके कारण होने वाला दर्द, अत्यधिक थकान और नींद की कमी दैनिक कार्यों के करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

क्या होता है फाइब्रोमायल्जिया
पेन एक्सपर्ट डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि फाइब्रोमायल्जिया से ग्रस्त लोग अक्सर सोने के बाद भी थके हुए जागते हैं, भले ही वे लंबे समय से सो रहे हों। इसमें नींद अक्सर बाधित होती है और इससे ग्रस्त कई रोगियों को अन्य नींद के विकार जैसे स्लीप एप्निया और रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम होते हैं। मस्तिष्क में नसों और दर्द संकेतों की समस्या के कारण फाइब्रोमायल्जिया हो सकता है। फाइब्रोमायल्जिया की तुलना गठिया से की गई है। गठिया की तरह फाइब्रोमायल्जिया दर्द और थकान का कारण बनता है, लेकिन गठिया के विपरीत फाइब्रोमायल्जिया लालिमा और सूजन या जोड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह बीमारी नींद की कमी का कारण भी बन सकती है।

सही समय पर पहचान जरूरी
फाइब्रोमायल्जिया के निदान के लिए डॉक्टर सीबीसी, एरिथ्रासाइट सेडीमेंटेशन रेट टेस्ट, साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड टेस्ट, गठिया कारक टेस्ट और थायराइड फंक्शन टेस्ट करवा सकते हैं। डॉ. संजीव ने बताया कि इस रोग के उपचार के लिए डॉक्टर का लक्ष्य पहले दर्द से राहत पहुंचाना होता है। वे दर्द निवारक दवाएं, एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीसीजर ड्रग्स दे सकते हैं। इसके अलावा वैकल्पिक उपचार में थेरेपी, एक्यूपंचर, योग, मेडिटेशन, नियमित व्यायाम, मसाज, रात में पर्याप्त नींद आदि शामिल हैं। अगर कोई कारण या शरीर में कमी मिलती है तो पहले उसे सुधारा जाए। इस बीमारी में मरीज कोई भी काम आधे घण्टे से ज्यादा न करें और काम करते समय, अपने उठने-बैठने का तरीका का ध्यान रखें।

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