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Parama Ekadashi 2023: परमा एकादशी दो दिन, गोविंददेवजी के विशेष झांकी के दर्शन

Parama Ekadashi 2023: श्रावण पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी दो दिन मनाई जा रही है। त्रिपुष्कर और वज्र योग में एकादशी शुक्रवार और शनिवार दोनों ही दिन मनाई जा रही है।

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Parama Ekadashi 2023: परमा एकादशी दो दिन, गोविंददेवजी के विशेष झांकी के दर्शन

Parama Ekadashi 2023: परमा एकादशी दो दिन, गोविंददेवजी के विशेष झांकी के दर्शन

जयपुर। श्रावण पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी दो दिन मनाई जा रही है। त्रिपुष्कर और वज्र योग में एकादशी शुक्रवार और शनिवार दोनों ही दिन मनाई जा रही है। शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर व गोपीनाथजी मंदिर में शनिवार को एकादशी मनाई जाएगी। मंदिर में विशेष झांकी के दर्शन होंगे। अन्य मंदिरों में आज भी एकादशी मनाई जा रही है। मंगला झांकी से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

शहर के अराध्य गोविंददेवजी मंदिर में एकादशी पर शनिवार सुबह ठाकुरजी का अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण करवाई जाएगी। मंगला झांकी से ही ठाकुरजी के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। वहीं पुरानी बस्ती स्थित राधागोपीनाथजी मंदिर में शनिवार को एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन ठाकुरजी के अभिषेक कर गोचारण की विशेष झांकी के दर्शन होंगे। वहीं चौड़ा रास्ता स्थित मंदिरश्री राधा दामोदरजी में भी शनिवार को ही पुरुषोत्मा एकादशी मनाई जाएगी। ठाकुरजी का विशेष शृंगार दर्शन होगा। इस दिन श्रद्धालु मंदिर में दान—पुण्य करेंगे।

दो दिन उदया तिथि
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि एकादशी शुक्रवार सुबह 5:07 बजे शुरू होगी, जो 12 अगस्त को सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। दोनों ही दिन उदया तिथि में एकादशी होने से पुरुषोत्तम मास में दो दिन एकादशी का संयोग बना है। हालांकि वैष्णव 12 अगस्त को एकादशी का व्रत रखेंगे।

एकादशी का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत काफी शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। सालभर में 24 एकादशी पड़ती है। ऐसे में हर मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष को एक-एक एकादशी पड़ती है। लेकिन इस साल अधिकमास होने के कारण 2 एकादशी बढ़ गई है। अधिक मास में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि यह तीन साल में एक बार आती है।

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माता लक्ष्मी का मिलता आशीर्वाद
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस व्रत को कुबेर जी ने किया था तो भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें धनाध्यक्ष बना दिया था। इतना ही नहीं, इस व्रत को करने से सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र को पुत्र, स्त्री और राज्य की प्राप्ति हुई थी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के दौरान पांच दिन तक स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौ दान करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसे धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती।