
कॉइनडीसीएक्स नाम का दुरुपयोग, अदालत से संस्थापकों को राहत
नई दिल्ली. डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लोगों की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है, वहीं साइबर ठगी और इम्पर्सनेशन (पहचान की नकल) जैसे अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में सामने आया एक मामला इस बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जिसमें कॉइनडीसीएक्स का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। इस मामले में कॉइनडीसीएक्स के सह-संस्थापकों सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल को अदालत से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने खुद को कॉइनडीसीएक्स के संस्थापक बताकर शिकायतकर्ता को धोखा दिया। शिकायतकर्ता ने भी अदालत में यह स्वीकार किया कि धोखाधड़ी में शामिल व्यक्ति असली संस्थापक नहीं थे, बल्कि उनकी पहचान का दुरुपयोग कर रहे थे। जांच अधिकारी ने जमानत का विरोध नहीं किया, जिससे यह साफ हो गया कि मामले में सह-संस्थापकों की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले के पीछे एक फर्जी वेबसाइट कॉइनडीसीएक्स.प्रो का इस्तेमाल किया गया था। इस वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह कॉइनडीसीएक्स के आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसी लगे और उपयोगकर्ताओं को भ्रमित कर सके। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसका एकमात्र आधिकारिक प्लेटफॉर्म कॉइनडीसीएक्स.कॉम है और फर्जी वेबसाइट का उससे कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट….
विशेषज्ञों का मानना है कि इम्पर्सनेशन और फिशिंग स्कैम डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। इससे न केवल उपयोगकर्ताओं की मेहनत की कमाई पर असर पड़ता है, बल्कि कंपनियों की विश्वसनीयता और ब्रांड इमेज को भी नुकसान पहुंचता है। इस मामले में कॉइनडीसीएक्स जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है ताकि वास्तविक दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
Published on:
01 Apr 2026 11:12 pm
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