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पत्रिका का 70वां स्थापना दिवस: कलम की ताकत और जनता का विश्वास

पत्रिका समूह आज अपना 70वां स्थापना दिवस मना रहा है। पत्रिका ग्रुप प्रिंट मीडिया के साथ-साथ रेडियो और डिजिटल प्रारूप में भी लोगों की पहली पसंद है।

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rajasthan patrika foundation day

जयपुर। पत्रिका समूह आज अपना 70वां स्थापना दिवस मना रहा है। 'राजस्थान पत्रिका' को विश्वसनीयता और उच्च मूल्यों की पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। यही वजह है लोग इसे ‘न्यूज पेपर विद अ सोल’ के नाम से जानते हैं। पत्रिका ग्रुप प्रिंट मीडिया के साथ-साथ रेडियो और डिजिटल प्रारूप में भी लोगों की पहली पसंद है।

अखबार स्वतंत्र हो, उस पर किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का प्रभाव न रहे लेखनी पर कोई बन्दिश न रहे। निष्पक्षता व निर्भीकता के श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के इस मंत्र को पत्रिका ने आत्मसात कर रखा है।

देखें 'पत्रिका' की सात दशक की यात्रा से जुड़ी शॉर्ट फिल्म-

सही मायने में इसी मकसद को पूरा करने के लिए कुलिश जी ने 7 मार्च 1956 को एक सायंकालीन दैनिक के रूप में राजस्थान पत्रिका का पौधा लगाया था जो आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।

कुलिश जी ने पत्रिका को हिन्दी पत्रकारिता जगत् में शिखर पर प्रतिष्ठित किया। मित्रों से मिले पांच 500 रुपए के ऋण से प्रारम्भ हुआ ‘सायंकालीन पेपर’ अपने तेवर और साख की बदौलत पौधे से वटवृक्ष के रूप में विकसित हुआ। सुबह का अखबार पाठकों के विस्तृत ‘पत्रिका परिवार’ में उजाला फैलाने लगा। आज 8 राज्यों में 38 संस्करणों के साथ पत्रिका समूह कुलिशजी के घोष ‘य ऐषु सुप्तेषु जागर्ति’ यानी ‘सोए हुओं में जागने वाला’ को नित्य फलीभूत कर रहा है।

आज भी पत्रिका समूह की रीति-नीति के केन्द्र में पाठक और कर्म को इंगित करता हुआ व्यापक जनहित ही रहता है। इन सिद्धांतों के निर्वाह में कुलिश जी को भी बहुतेरा संघर्ष करना पड़ा था। सरकारों की नाराजगी झेलते हुए संघर्ष करते रहने का दृढ़संकल्प आज कुलिश जी की तीसरी पीढ़ी में भी कायम है।


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