
जयपुर. 'जब से मोबाइल अस्तितव में आया है, तब से रिश्तों में गिरावट आ रही है। लोगों ने एक दूसरे से मिलना-जुलना ही कम कर दिया है। बस केवल दो टुक औपचारिक बात मोबाईल पर हो जाती है।' जैसे ही ग्रेजुऐशन की स्टूडेंट सबिया नूर ने अपनी बात खत्म की तो दूसरी ओर से सुमैया ने असहमति जताते हुए कहा कि आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास दो पल की फुरसत नहीं है, लेकिन मोबाइल एकमात्र ऐसी चीज है जिसने सभी को आपस में जोड़ रखा है। ये नजारा था घाटगेट स्थित आहंगरान कॉलेज का, जहां गुरूवार को पत्रिका की ओर 'मोबाइल: वरदान या अभिशाप' विषय पर टॉक शो का आयोजन किया गया।
'उपयोग सीमित होना चाहिए'
इस दौरान मोबाइल के पक्ष और विपक्ष में स्टूडेंट्स ने एक से बढ़कर एक तर्क-वितर्क रखे। निष्कर्ष निकला कि मोबाइल आज हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है, लेकिन इसका उपयोग सीमित होना चाहिए।
इन्होंने बताया मोबाइल को वरदान
जेनब, गुलफशा खान, कुलसुम अय्यूब, माहीन फातिमा, तैबा खान, अर्शिया और समीरा जोया ने जरूरी बताचीत बिजनैस, आॅनलाइन ट्रांजेक्शन शोपिंग, लोकेशन, एजुकेशन आदि के मुद्दे पर मोबाइल की उपयोगिता बताई।
इन्होंने बताया मोबाइल को अभिशाप
कशिश अली, महक नकवी, नोशीन अली, सना सिद्दीकी, बुशरा, कौसर पटेल, अनम अली, सुहाना खान, फिजा, शुमाइला परवीन, अमरीन और रूबी ने मोबाइल रेडिएशन, सायबर क्राइम, बच्चों को लत, ऑनलाइन गेम के नुकसान बताते हुए मोबाइल को अभिशाप बताया।
'पहली बार हमारी बेटियों को इस तरह का मंच मिला'
कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अजमल हमीद ने कहा कि मॉइनोरिटी कॉलेज में पत्रिका की बदौलत पहली बार इस तरह का मंच उपलब्ध हुआ है। जहां हमारी बेटियां उत्साह और जोश के साथ अपने विचार रख रही हैं, ऐसे में हम पत्रिका के शुक्रगुजार हैं। समाजसेवी रफीक गारनेट ने कहा कि पत्रिका टॉक शो ऐसा प्लेटफार्म है, जहां आमजन को भी अपनी आवाज बुलंद करने का मौका मिलता है।
इस दौरान शिक्षिका कीर्ति सोनी, आशा किरण शर्मा और रियाजुद्दीन समेत अन्य मौजूद रहे।
Published on:
07 Jul 2022 09:15 pm

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