
जयपुर . राजधानी में भूजल स्तर हर साल औसतन 0.5 मीटर गिर रहा है। पेयजल की उपलब्धता भूजल से लगातार कम हो रही है। यही कारण है कि जनता से लेकर सरकार तक सब बीसलपुर पर निर्भर होकर रह गए हैं। इसके बावजूद शहर में पेयजल के इस स्त्रोत का दोहन बेधड़क हो रहा है। इसमें सरकारी एजेंसियां भी पीछे नहीं हैं। शहर में 1 हजार से ज्यादा उद्यान हैं लेकिन इनमें से 3 बड़े पार्कों को छोड़ दें तो सभी जगह भूजल से ही सिंचाई की जा रही है। महज ३ उद्यानों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जो भी नाकाफी ही साबित हो रहे हैं।
शहर में 265 एमएलडी क्षमता के कुल 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इनमें से 215 एमएलडी गंदा पानी परिशोधित किया जा रहा है। लेकिन केवल 6 एमएलडी का उपयोग सिंचाई के लिए हो रहा है। बाकी पानी नालों में बहाया जा रहा है। यानी 209 एलएलडी पानी भूजल से खींचा जा रहा है।
प्रति व्यक्ति 70 लीटर पेयजल बचे
जलदाय विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रति व्यक्ति प्रतिदिन करीब 135 लीटर पानी का उपभोग करता है। इसमें खाने-पीने, नहाने में 70 लीटर पानी का उपभोग मानते हैं। सिंगापुर व अन्य देशों की तर्ज पर ऐसे परिशोधित पानी को घरों तक पहुंचा दिया जाए तो बाकी 70-75 लीटर पेयजल बचाया जा सकता है। खुद जलदाय विभाग के अभियंता मौजूदा स्थितियों में इसकी जरूरत मान रहे हैं।
भूजल विशेषज्ञ डॉ.एसके जैन 5 वर्ष में भूजल स्तर 10 मीटर तक नीचे गिरा है। बीसलपुर का पानी उपलब्ध होने के बाद इसकी गिरावट का आंकड़ा 1 से घटकर 0.5 मीटर तक पहुंचा है लेकिन अलार्मिंग स्थिति है। डार्क जोन के बावजूद जगह-जगह अवैध तरीके से बोरिंग खोदे जा रहे हैं। ट्रीटमेंट प्लांट का ज्यादा से ज्याद उपयोग करना बहुत जरूरी हो गया है। रिचार्ज स्ट्रक्चर का रखरखाव नहीं होने के कारण भी पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।
इजराइल: समुद्र का पानी पीने योग्य
इजराइल में तो समुद्र के पानी को पीने योग्य बना लिया गया जबकि हम सीवर के पानी को सिंचाई योग्य बनाने और उसका उपयोग करने के लिए भी जूझ रहे हैं। पीने की स्थिति पर लाने की प्रक्रिया तो बहुत दूर की कौड़ी है। गत वर्ष प्रधानमंत्री इजराइल गए तब वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें समुद्र का फ्ल्टिर पानी पिलाया था। यह सब कुछ गेल-मोबाइल वाटर डिसेलिनेशन एंड प्यूरिफिकेशन तकनीक से हो सका। एक वाहन एक दिन में समुद्र के 20 हजार लीटर तक खारे पानी को शुद्ध करता है और 80 हजार लीटर तक नदी के दूषित पानी को शुद्ध करता है।
इस तरह पेयजल का दोहन
गंदे पानी को सिंचाई योग्य बनाने के लिए करोड़ों रुपए लागत से ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए। इसके बावजूद हर दिन कई लाख लीटर परिशोधित पेयजल नालों में बहाकर पेयजल से सिंचाई की जा रही है। इस गंभीर स्थिति की पोल खुद सरकारी आंकड़े खोल रहे हैं। जयपुर में 265 एमएलडी क्षमता के 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इसमें फिलहाल करीब 81 प्रतिशत क्षमता का उपयोग हो रहा है। यानी 215 एमएलडी सीवरेज पानी प्रतिदिन पहुंच रहा है। ढहलावास व ब्रह्मपुरी एसटीपी में तो क्षमता से ज्यादा सीवरेज पानी आ रहा है। गंभीर यह है कि इसमें से महज 6 एमएलडी (2.79 प्रतिशत) परिशोधित पानी को ही उपयोगी बनाया जा सका है। बाकी पानी नालों में बहाकर जिम्मेदार चैन की नींद सो रहे हैं। जबकि इस पानी का उद्योग, बागवानी, सिंचाई, शौचालयों व अन्य कार्यों में कर लाखों लीटर पेयजल बचाया जा सकता है।
Published on:
22 Mar 2018 03:30 pm
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