
जयपुर.
जलदाय विभाग में ठेकाफर्मों और इंजीनियरों के गठजोड़ का तोड़ जलदाय मंत्री महेश जोशी भी नहीं निकाल पाए हैं। जयपुर शहर के उत्तर सर्कल के द्वितीय व तृतीय खंड में जीपीएस फर्म से मिलीभगत कर टैंकर ठेका फर्म ने फर्जी ट्रिप दिखाकर जमकर चांदी कूटी। स्पेशल ऑडिट में भ्रष्टाचार की पोल भी खुल गई और टैंकर फर्म से 10.67 लाख रुपए की वसूली हुई और जीपीएस फर्म का 12 लाख से ज्यादा का भुगतान रोका गया। लेकिन विभाग के सीनियर इंजीनियर जीपीएस और ठेका फर्म के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक वर्ष से चुप्पी साध कर बैठे हैं।
सालाना 7 करोड़ से ज्यादा का बजट-गड़बड़ी मार्च से जून के बीच
जयपुर शहर में एक वर्ष के लिए राज्य सरकार 7 करोड़ से ज्यादा का बजट टैंकरों से पेयजल परिवहन के लिए देती है। 80 फीसदी बजट मार्च से लेकर जून के महीने में खर्च होता है। इन्हीं महीनों में ठेका फर्म और इंजीनियर मिलीभगत कर टैंकरों की डिमांड की फर्जी एंट्री करते हैं और फर्म को भुगतान में हेराफेरी होती है।
कार्रवाई एक वर्ष से ठंडे बस्ते में
जीपीएस फर्म और टैंकर ठेका फर्म के खिलाफ कार्रवाई एक वर्ष से ठंडे बस्ते में हैं। फर्मों के खिलाफ रिमूवल फ्रॉम रजिस्टर की कार्रवाई करनी थी। लेकिन अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर द्वितीय आरसी मीणा और मुख्य अभियंता शहरी केडी गुप्ता ने कोई कार्रवाई नहीं की। फर्मों की इस कारगुजारी की जांच आईटी सेल के द्वारा सभी आठ खंडों में की जा रही है।
वर्जन
दोनों फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। एक फर्म बिल दे रही है लेकिन हम भुगतान नहीं कर रहे हैं। लेकिन राजस्व से जुड़े मामलों में कार्रवाई में समय लगता है।
आरसी मीणा-अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर द्वितीय
Published on:
17 Jan 2023 11:04 pm
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