
फोटो:-मदन मोहन मारवाल
जयपुर। राज्य सरकार ने पूरे प्रदेशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन कर रखा है। इसके बावजूद दोनों नगर निगम में कचरे में रोजाना 200 से 300 टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। ऐसे में नगर निगम ग्रेटर से इस कचरे से कमाई शुरू कर दी है, ताकि प्लास्टिक कचरे का डिस्पोजल हो सके। उधर, हैरिटेज नगर निगम ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया है। निगम ने एक फर्म को ग्रेटर क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा कलेक्शन का ठेका दिया है। यह फर्म हर महीने इस कचरे के एवज में ग्रेटर निगम को 9 लाख रुपए का भुगतान करेगी। निगम के सभी 8 कचरा ट्रांसफर स्टेशन से यह कचरा एकत्रित किया जाएगा। फर्म को एक साल का ठेका दिया गया है। गौरतलब है कि पूरे राजस्थान में हर साल 60 हजार टन से ज्यादा प्लास्टिक वेस्ट निकल रहा है, लेकिन 10 हजार टन के आसपास ही इसका निस्तारण किया जा रहा है। अगर निकाय जागें तो इस वेस्ट को खत्म किया जा सकता है।
इंदौर पहले से कर रहा है कमाई
ऐसा नहीं है कि प्लास्टिक वेस्ट केवल राजस्थान से ही निकल रहा हो। देश के कई अन्य शहर भी हैं, जहां प्लास्टिक वेस्ट निकल रहा है। ये शहर पहले से ही इस वेस्ट को बेच रहे हैं। इंदौर-रायपुर इस कचरे से मोटी कमाई कर रहे हैं। दोनों निगमों से डेढ़ से दो करोड़ रुपए के बीच प्लास्टिक वेस्ट से कमाई की है। यहां सीमेंट संयंत्रों को यह प्लास्टिक वेस्ट बेचा जा जा रहा है। ताकि इसे खत्म भी किया जा सके।
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धरती को बांझ कर रहा है प्लास्टिक
सिंगल यूज प्लास्टिक को खत्म नहीं किया जा सकता है। रोजाना घरों से निकलने वाले कचरे में प्लास्टिक की मात्रा बहुत ज्यादा होती, जिसकी वजह से धरती बांझ होती जा रही है। यह उपजाउ भूमि को अनुपजाउ कर रही है। मगर सरकारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
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प्लास्टिक वेस्ट के डिस्पोजल के लिए एक फर्म को ठेका दिया गया है। फर्म हर महीने सभी 8 कचरा ट्रांसफर स्टेशन से प्लास्टिक कचरा बीनकर अलग करेगी। इससे निगम को हर महीने 9 लाख रुपए की आय होगी।
अतुल शर्मा, उपायुक्त गैराज, ग्रेटर नगर निगम
Published on:
07 Jan 2023 06:51 pm
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