
Gulab Kothari Articles : स्पंदन : मर्यादा भी बंधन : मर्यादा जीवन के सुचारू रूप से जीने का मार्ग है, वहीं अनेक मानसिक द्वन्द्वों की जनक भी है। बन्धन में आदान-प्रदान है। ऋण है, ऋण मोचन है। यह ऋण ही बन्धन है। मां-बाप ने शरीर दिया तो माता-पिता का ऋण चुकाना पड़ेगा। यही तो बन्धन है।
Published on:
10 Mar 2026 03:56 pm
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