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परवाना नहीं आया

Hindi Poem

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परवाना नहीं आया

परवाना नहीं आया

परवाना नहीं आया
दलवीर सोलंकी 'परवाना'

यह सच है जहां वालों,
हमें जीना नहीं आया।

हमारे लाख मरने पर भी,
हमें मरना नहीं आया।

बड़ी आसान राहें थी,
न मंजिल थी कोई मुश्किल,
मगर आसान राहों पर हमें,
चलना नहीं आया।

सिसकती रात के साए में जब
खो जाएंगे दलवीर
शमां जल-जल कर पूंछेगी
कि परवाना नहीं आया।

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