
हो रही थी शहर की हवा खराब, कहना नहीं माना तो निगम आयुक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज
कोटा. प्रदूषण को लेकर न्यायालय, सरकार और आमजन भी गंभीर है। शहर र्और शहरवासियों की सेहत प्रदूषण से खराब नहीं हो इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस मुहिम को हल्के में लेने और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि अधिकारियों तक को नहीं बख्शा जा रहा है। ताजा मामला कोटा में सामने आया है। यहां राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों को नहीं मानकर कोटा शहर की आबोहवा में जहर घोलने का काम कर रहे नगर निगम के आला अफसरों को भारी पड़ गया। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) ने नान्ता स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में बेतरतीब कूड़ा फेंक कोटा की हवा और पानी को दूषित करने के आरोप में नगर निगम आयुक्त जुगल किशोर मीणा के खिलाफ नामजद आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लेनी थी अनुमति
वर्ष 2001 में नगर निगम ने कूड़े का निस्तारण करने के लिए राजस्थान अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट प्रोजेक्ट (आरयूआइडीपी) के तहत बालिता में 25 हेक्टेयर, कुन्हाड़ी में 16 हेक्टेयर और नान्ता रोड पर 16.3 हेक्टेयर जमीन पर ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। सरकार ने बालिता और कुन्हाड़ी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, लेकिन नान्ता में ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थापित करने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन निगम ने आरएसपीसीबी से प्राधिकार पत्र हासिल किए बगैर ही वहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया।
16 साल में भी दूर नहीं हुई खामियां
निगम ने वर्ष 2002 में प्राधिकार पत्र हासिल करने के लिए आरएसपीसीबी को नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड की डीपीआर सौंपी थी, लेकिन जब बोर्ड ने स्थलीय निरीक्षण किया तो ऑर्गेनिक, री साइकल और बायोमेडिकल वेस्ट की छंटनी न करने, वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित न करने, हाईवे के समानान्तर 20 मीटर जगह न छोडऩे और ट्रेंचिंग ग्राउंड के चारों ओर ग्रीन बेल्ट तैयार न करने समेत 32 खामियां मिली। जिन्हें दूर करने तक बोर्ड ने प्राधिकार पत्र जारी करने से इनकार कर दिया। ट्रेंचिंग ग्राउंड की मियाद महज 14 साल थी, लेकिन निगम इन खामियों को 16 साल में भी पूरी नहीं कर पाया।
पीसीबी ने दिया नोटिस
प्राधिकार पत्र के बिना ही नगर निगम नान्ता स्थित अवैध ट्रेंचिंग ग्राउंड पर रोजाना 551 मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा डंप कर पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ा रहा था। राजस्थान पत्रिका ने जब 13 अप्रेल को 'नान्ता कुन्हाड़ी इलाके में प्रदूषण से पसरा कैंसरÓ खबर प्रकाशित की तो तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी ने 17 अप्रेल को नगर निगम को नोटिस जारी कर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 की सख्ती से पालना के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी निगम अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद आरएसपीसीबी ने 29 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज करा दिया। गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उलंघन करने पर आरएसपीसीबी ने बीते चार महीने में आला अफसरों के खिलाफ चार महीने में दूसरी बड़ी बड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान में यह दूसरा मुकदमा है और दोनों मुकदमे कोटा में ही दर्ज कराए गए हैं।
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वर्जन
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के निर्देशों की पालना न करने के आरोप में नगर निगम आयुक्त के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया है।
अमित जुयाल, क्षेत्रीय अधिकारी, आरएसपीसीबी कोटा
Published on:
01 Nov 2018 12:56 am
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