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स्टाफिंग पैटर्न से अधिशेष हुए 2400 शिक्षकों का पदस्थापन

राजस्थान की राजनीति ने शिक्षा को बेड़ा गर्क कर दिया है। मुख्यमंत्री जहां विरोधियों को राजनीति का पाठ पढ़ाने में लगे हैं वहीं राजस्थान के विद्यार्थियों का पाठ फेल होता जा रहा है। कभी किताबें नहीं पहुंच रही हैं तो कभी शिक्षकों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। राजनीति का चरम जारी है। यही राज्य की सबसे बड़ी बीमारी है।

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churu school news- जब कोई रुचि ही नहीं ले रहा, तो स्कूलों में कैसे तैयार होंगे बाल वैज्ञानिक...

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राजस्थान की राजनीति ने शिक्षा को बेड़ा गर्क कर दिया है। मुख्यमंत्री जहां विरोधियों को राजनीति का पाठ पढ़ाने में लगे हैं वहीं राजस्थान के विद्यार्थियों का पाठ फेल होता जा रहा है। कभी किताबें नहीं पहुंच रही हैं तो कभी शिक्षकों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। राजनीति का चरम जारी है। यही राज्य की सबसे बड़ी बीमारी है।

प्रारंभिक शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न से अधिशेष हुए 2400 शिक्षकों के पदस्थापन के आदेश शिक्षा विभाग ने जारी कर दिए हैं। पिछले नौ महीने से पदस्थापन अटका हुआ था। इसका असर यह था कि स्टाफिंग पैटर्न के बाद भी ये शिक्षक पुराने स्कूलों में ही कार्यरत थे। विभाग करीब 12 करोड़ रुपए की सैलरी बिना काम के ही इन शिक्षकों को दे रहा था।

दूसरी ओर जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त थे, वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब इन शिक्षकों के पदस्थापन प्रक्रिया शुरू हो गई है। गौरतलब है कि आठ अक्टूबर को राजस्थान पत्रिका में ‘स्टाफिंग पैटर्न के बावजूद 2400 शिक्षकों का पदस्थापन नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को प्रमुखता से उठाया गया था।

यह है मामला

प्रारंभिक शिक्षा विभाग में जनवरी-2022 में स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा की गई। राज्यभर से करीब 2400 शिक्षकों को अधिशेष घोषित कर जरूरत वाली स्कूलों में भेजने के लिए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों से काउंसलिंग कराई। स्कूल आवंटित कर पदस्थापन आदेश भी जारी कर दिए। लेकिन प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने उनके कार्यग्रहण पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी। तब से अधिशेष शिक्षक कार्यग्रहण करने के आदेश का इंतजार कर रहे थे।