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राजस्थान के बिजलीघरों में गहराया कोयला संकट, गांव-कस्बों में अघोषित कटौती

Power Crisis In Rajasthan: राजस्थान के सरकारी बिजलीघरों में कोयला संकट गहरा गया है। इससे बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
जयपुर। Power Crisis In Rajasthan: राजस्थान के सरकारी बिजलीघरों में कोयला संकट गहरा गया है। इससे बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। हालात यह है कि कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। इससे 600 मेगावॉट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके अलावा ज्यादातर बड़े पावर प्लांट में भी एक दिन का भी कोयला नहीं है।

कोटा थर्मल में आधे दिन, सूरतगढ़ थर्मल में एक दिन, छबड़ा सुपर क्रिटिकल में 2.5 दिन, कालीसिंध में आधे दिन के अलावा छबड़ा में 48 एमटी कोयला बचा है। ऊर्जा विभाग की 18 अगस्त की पावर पॉजिशन रिपोर्ट के आधार पर यह स्थिति सामने आई है। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है, जबकि उसके अनुपात में बिजली उत्पादन के लिए कोयला सीमित मात्रा में उपलब्ध हो रहा है। इसी कारण यह स्थिति बनी है। इसका साइड इफेक्ट यह है कि प्रदेश में बिजली कटौती के हालात बन रहे हैं। गांव-ढाणियों से लेकर कस्बों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है। हालांकि, राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लोड मैनेजमेंट में जुटा है।

बिजली संकट के बीच कटौती की मार
- स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर से सीधे 220 केवी जीएसस पर कटौती हो रही है। पिछले दो दिन में कई जीएसएस को मैसेज भी भेजा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग हर दिन एक से दो घंटे की अतिरिक्त कटौती का सामना कर रहे हैं।
- 16 अगस्त को 45 जीएसएस पर 30 घंटे तक और 26 जीएसएस पर एक घंटे से अधिक समय तक बिजली कटौती हुई
- 17 अगस्त को 220 केवी के 29 जीएसएस पर आधे घंटे और 220 केवी के 95 जीएसएस पर एक घंटे से अधिक की कटौती की गई।

900 लाख यूनिट की खपत बढ़ी
1 से 17 अगस्त के बीच करीब 900 लाख यूनिट खपत बढ़ी है। एक अगस्त को जहां 2011 लाख यूनिट बिजली खपत थी, वही 17 अगस्त को 2983 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इसी दौरान कोयला संकट के चलते कालीसिंध की एक यूनिट बंद करनी पड़ी।

महंगी बिजली खरीद से बचें और कटौती कम से कम हो

मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने बुधवार को राज्य में बिजली आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। बिजली की डिमांड और उसके अनुपात में बिजली उत्पादन की जानकारी ली। इस बीच सामने आया कि अभी एक्सचेंज से बिजली खरीद की दर पहले कि अपेक्षा महंगी है। इस पर आर्य ने अफसरों को राज्य के बिजलीघरों से ही आवश्यक उत्पादन करने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए कहा, जिससे इस समय एक्सचेंज से महंगी बिजली कम खरीदनी पड़े और जनता पर इसका भार नहीं आए। उन्होंने हर स्तर पर बिजली उत्पादन में कमी नहीं आने की सुनिश्चितता की जरूरत जताई।

अधिकारियों ने बताया कि गत दिनों में मानसून की कमी तथा कोयले की कम आपूर्ति के कारण समस्या आई है। इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि मौजूदा हालात में बिजली की कटौती कम से कम हो एवं आवश्यक सेवाओं बाधित नहीं हो। उन्होंने बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति की जानकारी ली। इस बीच डिस्कॉम्स का घाटा बढ़ने पर चिंता जताई।

इसके लिए खर्चों की मॉनिटरिंग, बिजली छीजत में कमी लाने सहित अन्य पहलुओं पर फोकस करने के लिए कहा। इस दौरान वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोरा ने कहा कि बिजली कम्पनियों के आर्थिक संकट को देखते हुए सभी डिस्कॉम एवं राज्य उत्पादन निगम को अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए तथा स्वयं का वित्तीय प्रबंधन कुशल करें। बैठक में ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन दिनेश कुमार सहित अन्य उच्च अधिकारी भी वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।